नारायणपुर के बलाहा गंगाघाट पर सोमवार को एक भावुक और समाज के लिए प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब एक बेटी ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया।

क्या है मामला

वार्ड नंबर एक निवासी शशि रजक (52) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनकी तबीयत रविवार को अचानक बिगड़ने पर उन्हें भागलपुर के एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

बेटियों ने लिया साहसिक फैसला

शशि रजक की पांच बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं है। उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार को लेकर गांव में चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने परंपरा के अनुसार भतीजे या नाती से मुखाग्नि दिलाने का सुझाव दिया।

लेकिन बेटियों ने समाज की परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए खुद आगे आने का निर्णय लिया। सभी बेटियों ने मिलकर अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट तक पहुंचाया।

रिमझिम ने दी मुखाग्नि

ग्रामीणों के अनुसार, सबसे छोटी बेटी रिमझिम कुमारी (16) ने बलाहा गंगाघाट पर अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस भावुक पल को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

रिमझिम हाई स्कूल नारायणपुर की छात्रा है और इस वर्ष उसने मैट्रिक परीक्षा दी है। परिवार की तीन अन्य बेटियां विवाहित हैं।

समाज के लिए संदेश

यह घटना न सिर्फ भावुक कर देने वाली है, बल्कि समाज में बेटियों की भूमिका और उनकी जिम्मेदारी को भी मजबूती से दर्शाती है। रिमझिम ने यह साबित कर दिया कि बेटियां भी हर वह कर्तव्य निभा सकती हैं, जिसे समाज अक्सर केवल बेटों से जोड़कर देखता है।

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By न्यूज़ डेस्क

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