नवगछिया में सती बिहुला के मायके आगमन पर श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। बिहुला चौक में माता विषहरी की पांच बहनों के साथ उन्हें सिंहासन पर विराजमान कर वैदिक विधि-विधान से पूजा की गई।
सुबह से ही महिलाएं डलिया चढ़ाकर पूजा-पाठ कर रही हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, हर साल 17 अगस्त को सती बिहुला का नवगछिया में आगमन होता है। पूजा समारोह के आयोजक ने बताया कि 18 अगस्त को संध्या विसर्जन यात्रा के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
स्वामी आगमानंद महराज की पहल ‘एक दीप माता बिहुला के नाम’ को शहरवासियों का भरपूर समर्थन मिला। शहर के हर चौक, चौराहे और गली में संध्या समय दीप जलाकर बिहुला माता का स्वागत किया गया। इस दौरान जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय हो गया।

पौराणिक कथा के अनुसार, चंपानगर के व्यापारी चांदो सौदागर शिवभक्त थे। विषहरी, जो शिव की पुत्री मानी जाती हैं, की पूजा से उन्होंने मना कर दिया। इसके कारण विषहरी ने उनके छोटे बेटे लखेंदर को उसकी शादी के दिन डस लिया। सती बिहुला अपने पति लखेंदर के प्राण बचाने स्वर्गलोक गईं और उन्हें वापस लाईं। अंततः चांदो सौदागर ने बाएं हाथ से विषहरी की पूजा की। तभी से अंग जनपद में यह पर्व मनाया जाता है।

