नवगछिया । संतमंत सत्संग में आये आचार्यो ने लोगों को जीवन जीने का मार्ग बताते हुए अच्छा कर्म करने की सलाह दी। कहा कि जैसा कर्म करेंगे वैसा ही फल मिलेगा, हम मानव को हरवक्त यह सोचना चाहिए कि हम गलत नहीं करें नहीं तो हमे उसका फल यहीं भोगना पड़ेगा। डॉ. प्रोफेसर गुरु प्रसाद ने कहा कि शरीर की उपयोगिता शुभ  कर्म करने से है।

Whatsapp group Join

आचार्यो ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा था जो  मन से इंद्रियों को रोक कर कर्म करता हैं  इंसान जो कर्म करता है वही आगे आगे आता है कर्म का फल भोगना ही पड़ेगा। कर्म तो बंधा ही होता है। जब तक वैराग्य नहीं तब तक समाधि नहीं मिलती है। वेद व्यास  के 18 पुराणों के सारगर्भित अंश था कि परोपकार करने से पुण्य होता है पाप करने से पीडा सहना पड़ता है।

सत्संग करना और कराना भी उत्तम कार्य है। जैसे किसान अपने खेत मे जितना बोते है उससे कई गुना फसल घर लाते हैं। उसी प्रकार कर्मो का कई गुण फल भोगना पड़ता है अच्छा या बुरा कर्म एक लोहे और एक सोने की बेड़ी है अगर संत के शरण मे चले गए तो उनकी कृपा से आपके बुरे कर्मो का फल कट जाता है।

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Dinamobet
Dinamobet
Dinamobet