राज्य में भूमि सर्वेक्षण को लेकर संविदा आधारित दस हजार पदों पर बहाली की जाएगी। इसके लिए एक सप्ताह के अंदर विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। फरवरी, 2023 तक बहाली की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। मंगलवार को इस बात की जानकारी राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री आलोक कुमार मेहता ने दी। वे शास्त्रीनगर स्थित सर्वे प्रशिक्षण संस्थान में बंदोबस्त पदाधिकारियों की मासिक बैठक को संबोधित कर रहे थे। मेहता ने कहा कि भूमि सर्वेक्षण को जल्द पूरा करना महागठबंधन सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है। उम्मीद है कि दस हजार सर्वे कर्मियों की बहाली से निर्धारित समय सीमा के भीतर भू सर्वे के काम को पूरा कर पाना संभव होगा।


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बैठक में विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने कहा कि एक सप्ताह के अंदर शुरू होने वाली बहाली प्रक्रिया के तहत 8200 पद सिर्फ अमीन के होंगे। इसके अलावा बाकि के पद विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, कानूनगो और लिपिक के रखे गए हैं। इनकी बहाली के बाद फरवरी माह में इनको प्रशिक्षित कर बिहार के सभी 38 जिलों मे तैनात कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वे के तत्काल बाद चकबंदी कार्य पूरा करने की योजना है। चकबंदी का काम भी इन्हीं कर्मियों से कराया जाएगा।

फरवरी 2023 में भूमि सर्वेक्षण कार्य शुरू होगा, दो साल में होगा पूरा : ब्रजेश मेहरोत्रा

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने कहा कि राज्य में फरवरी, 2023 से भूमि सर्वेक्षण का कार्य शुरू हो जाएगा। अगले दो साल में भूमि सर्वेक्षण का कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 20 जिलों में चल रहे भूमि सर्वेक्षण का काम को ससमय पूरा करने के लिए बंदोबस्त पदाधिकारियों को कई जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रथम चरण के सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को कहा गया है कि वे अपने जिलों में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के काम में प्रारूप प्रकाशन का काम हर हाल में फरवरी तक पूरा कर लें। फरवरी के बाद पूरे बिहार में सर्वे कर्मियों की नए तरीके से पदस्थापन की जाएगी। फिलहाल प्रथम चरण के 20 जिलों के 89 अंचलों में भूमि सर्वेक्षण के विभिन्न चरणों का काम चल रहा है। जहां कुल 208 शिविरों के अंतर्गत 4989 गांवों में प्रारूप प्रकाशन का काम फरवरी, 2023 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है। श्री मेहरोत्रा मंगलवार को बंदोबस्त पदाधिकारियों की मासिक बैठक में ये बातें कही।

उन्होंने बताया कि अगले साल शिविरों की संरचना में भी परिवर्तन किया जाएगा। पूरे बिहार के सभी 534 अंचलों को शिविर के समतुल्य कर दिया जाएगा। अर्थात छोटा हो या बड़ा हरेक अंचल में सिर्फ एक शिविर होगा और हरेक शिविर में एक शिविर प्रभारी/सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, 2 कानूनगो, 2 लिपिक और हर 4 मौजा/गांव पर एक अमीन की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। साथ ही अगले साल के शुरू में पूरे बिहार में एक साथ भूमि सर्वेक्षण का काम शुरू कर दिया जाएगा। इस काम को अगले 2 साल में यानि 2024 के आखिर तक पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है।

बैठक में भू-अभिलेख और परिमाप निदेशक जय सिंह ने प्रथम चरण के सभी 89 अंचलो में भूमि सर्वे के काम की विस्तार से समीक्षा की। फिलहाल इस चरण के 4989 गांवों में से 93.4 फीसदी गांवों में ग्राम सीमा सत्यापन और 85 फीसदी गांवों में किस्तवार का काम पूरा कर लिया गया है। 1323 गांवों में खानापुरी का काम पूरा करके 450 गांवों में प्रारूप का प्रकाषन कर दिया गया है। अगले फरवरी तक सभी 4989 गांवों में प्रारूप प्रकाषन का लक्ष्य सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को दिया गया है।

फिलहाल जिन 89 अंचलों में भूमि सर्वेक्षण का काम जारी है वहां 208 शिविर बनाया गया है। अभी 30 से 40 मौजों पर एक शिविर का निर्माण किया गया है। ऐसे में छोटे अंचल में एक तो बड़े अंचलों में 3 से 4 शिविर कार्यरत हैं। हरेक शिविर में 1 विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, 1 से 2 कानूनगो, 1 लिपिक और औसतन 2 मौजा पर एक विषेष सर्वेक्षण अमीन की प्रतिनियुक्ति की गई है।

बैठक में भू- अभिलेख एवं परिमाप निदेशक जय सिंह और सहायक निदेशक अनिल कुमार सिंह भी उपस्थित थे। बैठक में प्रथम चरण के जिलों के बंदोबस्त पदाधिकारी, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी ;मुख्यालयद्धए हवाई एजेंसियों के प्रतिनिधि और सभी जिलों के नोडल पदाधिकारी उपस्थित थे।

By न्यूज़ डेस्क

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