बाढ़ विद्युत आपूर्ति प्रमंडल में दो जालसाजों ने फर्जी मार्कशीट जमा कर नौकरी हासिल कर ली, लेकिन जांच के बाद भांडा फूट गया. हालांकि, इस बीच करीब 10 वर्षों तक नौकरी कर दोनों कर्मियों ने लगभग 26 लाख रुपये वेतन के रूप में हजम कर लिया.

जांच के बाद दोनों के खिलाफ शुक्रवार को बाढ़ थाने में धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. आरोपित मोकामा थाना के सुल्तानपुर कन्हाईपुर गांव निवासी अर्जुन पासवान तथा खगड़िया थाने के मथुरापुर गांव निवासी ऋषिकेश आनंद हैं . केंद्रीय विद्युत आपूर्ति क्षेत्र पटना के नियोजन संख्या 1 -2007 अनुबंध के अंतर्गत दोनों की नियुक्ति के लिए सारणी पुरुष के पद पर छह माह के लिए संविदा पर हुई थी .

पूर्ववर्ती बिहार राज्य विद्युत बोर्ड से प्राप्त आदेश के आलोक में समय-समय पर संविदा अवधि का विस्तार किया गया था. इसके बाद बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के कार्यालय आदेश संख्या 346 -31 मार्च, 2015 के द्वारा कर्मियों के तकनीकी प्रमाणपत्र एवं तकनीकी प्रशिक्षण का अंकपत्र सहित कई कागजात की जांच उप निदेशक परीक्षा के द्वारा करायी गयी थी.

जांच के दौरान पाया गया कि अर्जुन पासवान द्वारा दिया गया अंकपत्र पूरी तरह जाली है. वहीं, ऋषिकेश आनंद द्वारा समर्पित अंकपत्र का अभिलेख में दर्ज अंकपत्र से भिन्न पाया गया . इस प्रकार दोनों कर्मियों ने जालसाजी के तहत नौकरी हासिल कर ली.

नौकरी करते हुए अर्जुन पासवान ने 13 लाख 60 हजार 568 रुपये और ऋषिकेश ने 12 लाख 30 हजार 111 रुपये वेतन मद में विभाग से पाये. इस मामले का भंडाफोड़ होने के बाद विद्युत कार्यपालक अभियंता अविनाश गौरव ने जांच प्रतिवेदन के साथ दोनों कर्मियों के खिलाफ शुक्रवार को प्राथमिकी दर्ज करायी है. वेतन मद में ली गयी राशि को भी वसूलने की कार्रवाई विभाग ने शुरू कर दी है.

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By न्यूज़ डेस्क

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