कोरोना संक्रमण के दूसरे लहर से जूझ रहे लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन बड़ी राहत है. बिहार में भी कोरोना के गहराए संकट के बीच टीकाकरण तेजी से जारी है. वहीं 18 साल से अधिक उम्र वाले युवाओं को भी वैक्सीन का डोज लगना शुरू हो गया है. इस बीच सरकार के लिए सबसे बड़ी समस्या उन लोगों को टीका लगवाना है जिनके पास कोई पहचान पत्र नहीं है. राज्य सरकार अब इन लोगों के लिए अलग व्यवस्था करने जा रही है. जिसके बाद इन्हें भी टीका लगाया जा सकेगा.
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बिहार में जिन लोगों के पास अपना पहचान पत्र नहीं है उन्हें भी कोरोना का टीका लग सकेगा. सरकार इसके लिए टास्क फोर्स की मदद लेने जा रही है. सरकार पूरे प्रदेश में टीकाकरण को लेकर गंभीरता बरत रही है. इस क्रम में उन लोगों को टीका लगाना भी बेहद जरुरी है जिनके पास पहचान पत्र नहीं है.
सरकार ने माना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में साधु-संत, जेलों में बंद कई कैदी, मानसिक रोग संस्थानों में इलाज करवा रहे मरीज, सड़क किनारे रहने वाले भिखारी समेत कई ऐसे लोग और भी हैं जिनके पास अपना कोई पहचान पत्र नहीं है. लेकिन कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए और इन लोगों के प्राणों की रक्षा के लिए टीका लगना बेहद जरुरी है.

बिना पहचान-पत्र वाले लोग टीका से वंचित नहीं रहें इसके लिए स्वास्थ्य विभाग टास्क फोर्स की मदद लेगी. जिलों में पहले से गठित टास्क फोर्स अपने-अपने जिले में वैसे लोगों की पहचान करेगी जिनके पास अपना पहचान-पत्र नहीं है. टास्क फोर्स को यह अधिकार दिया गया है कि वो इस काम में विभिन्न विभागों, संस्थाओं जैसे अल्पसंख्यक मामले, समाज कल्याण वगैरह की मदद ले सकती है.
बिना पहचान पत्र वाले लोगों में उन लोगों को अलग किया जाएगा जिनके पास मोबाइल या कोई दूसरी पहचान हो. वहीं जिनके पास कुछ भी नहीं है उनकी अलग कैटगरी होगी. इनकी पहचान होने के बाद इनके वैक्सीनेशन के लिए अलग से टीकाकरण केंद्र बनाया जाएगा. जिसके बाद इन्हें टीका दिया जा सकेगा. टीकाकरण केवल सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के कोविड टीकाकरण केंद्र पर ही होगा.

