जमुई: जमुई में हनीमून किडनैपिंग ने पुलिस की परेशानी बढ़ा दी है। लड़की के गायब होने के बाद अपहरण का मामला दर्ज हो रहा है। लेकिन, जब पुलिस मामले की तह तक पहुंचती है तो माजरा कुछ और ही निकलता है। मामला शादी या प्रेम-प्रसंग का जुड़ा होता है, जिसमें लड़की खुद से ही प्रेमी के साथ फरार हो जाती है। घर से भागने पर लड़की के स्वजन लोकलाज को ध्यान में रखते हुए उसके अपहरण का केस दर्ज करा देते हैं। ये सिर्फ जमुई तक ही सीमित नहीं रह गया है। बिहारभर में इस तरह के कई मामले हर रोज सामने आते हैं, जिसमें शादी की नीयत से अपहरण का मामला लड़की के घर वालों की ओर से कराया जा रहा है।

बेटी को वापस लाने के लिए परिवार वाले थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराते हैं। गंभीर मामला समझ पुलिस जब कार्रवाई करती है, तो लड़की को खोजने दूसरे जिले और राज्यों में भी जाना पड़ता है। परिवार एवं पुलिस की परेशानी के बाद जब लड़की वापस आती है तो साथ इनके प्रेमी से बना पति भी होता है। बेटी अपहरण से इनकार करती है और कोर्ट में 164 के बयान में अपने प्रेमी सह पति के साथ रहने की बात स्वीकार करती है। पुलिस की परेशानी इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इसे अपराध की श्रेणी में मानकर पड़ताल करती है।

स्मार्ट फोन देख समय से पूर्व बालिग हो रही लड़कियां

पाश्चात्य शैली अपनाने और स्मार्ट फोन के आने के बाद नाबालिग लड़कियां समय से पूर्व ही बालिग हो जा रही है। जबकि, पूर्व में बालिग होने की उम्र 20 से 25 साल होती थी। आज 15 साल की लड़कियां भी हर चीज को समझ रही है। स्मार्ट फोन पर हर चीज उपलब्ध है। जिसे देख कर युवा दिग्भ्रमित हो रहे हैं। स्मार्ट फोन का उपयोग करने के बजाय दुरुपयोग करते हैं और इसके लिए माता-पिता भी कम जिम्मेवार नहीं हैं। लोगों की भाग-दौड़ की जिंदगी हो गई है और बच्चे क्या कर रहे हैं, इसे देखने तक का समय नहीं है। एक घर में पिता अपने स्मार्ट फोन पर व्यस्त है, तो माता दूसरे कमरे में स्मार्ट फोन पर व्यस्त है, तो बच्चे भी स्मार्ट फोन लेकर व्यस्त हैं। माता-पिता का ध्यान नहीं होने के कारण भी युवा गलत रास्ते पर जा रहे हैं।

नहीं मिलता सपोर्ट, तो घर से भाग जाते हैं लड़के और लड़कियां

प्रेम विवाह को हमारे समाज में मान्यता नहीं है और घर-परिवार से इसमें कोई सपोर्ट नहीं मिलता है। अगर परिवारवालों को प्रेम की जानकारी मिलती है, तो लड़के-लड़कियों को समझाने के बजाय उसे डांटना शुरू कर देते हैं। जबकि, स्वजनों को समझाना चाहिए। लेकिन, ऐसा नहीं होता है। इसका नतीजा है कि कई मामलों में तो लड़के या लड़कियां चुपके से भाग निकलती है। क्योंकि, उन्हें घर या परिवार के किसी अन्य सदस्य से सपोर्ट नहीं मिलता है।

जमुई एसपी शौर्य सुमन ने कहा कि सभी थाना पुलिस को इस बात का पहले से निर्देश दिया हुआ है कि अगर किसी लड़की के गायब होने की सूचना मिले तो तुरंत मामला दर्ज करें और गायब होने के बिंदु पर जांच शुरु कर दें। लड़की के गायब होने के बाद अपहरण का मामला दर्ज किया जाता है, लेकिन अधिकतर शादी या प्रेम-प्रसंग का मामला सामने आता है।

केस स्टडी-एक: बीते साल के सितंबर माह में खैरा थाना के एक गांव से नाबालिग लड़की के अपहरण हो गया। लड़की के स्वजन ने पड़ोस के एक युवक पर लड़की को भगा ले जाने का आरोप लगाते हुए थाने में मामला दर्ज कराया था। छह माह बात इस साल के अप्रैल माह के शुरुआत में पुलिस ने लड़की को उसके प्रेमी के साथ सूरत से बरामद कर लिया।

केस स्टडी-दो: लक्ष्मीपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की एक लड़की का स्वजनों ने पटना में शादी करा दी। जिसके बाद लड़की ने अपने प्रेमी खैरा के गोपालपुर निवासी युवक को फोन कर पटना बुला लिया और उसके साथ चली गई। जबकि युवक पहले से शादीसुदा है और तीन बच्चों का पिता है।

केस स्टडी- तीन: 2021 के अक्टूबर माह में चंद्रमंडी थाना क्षेत्र के एक गांव से प्रेम-प्रसंग में एक लड़की घर से भाग गई थी। इसके उपरांत स्वजनों द्वारा थाना में लड़की को नाबालिग बताते हुए मामला दर्ज कराया गया था। एक अप्रैल को पुलिस ने उसे माधोपुर बाजार से बरामद किया।

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By न्यूज़ डेस्क

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