भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (बीईसी) के छात्रों ने मिलकर सेंसर युक्त गमला तैयार किया है, जो पौधे में पानी की कमी होने पर तत्काल इसकी सूचना मोबाइल पर दे देगा। बीईसी के छात्र निशांत कुमार और उनकी टीम ने इस पर काम कर सफलता पाई है। निशांत ने बताया कि गर्मी के मौसम में गमले में रखे तुलसी, सब्जी और फूल के पौधे पानी की उचित मात्रा नहीं मिलने की वजह से सूख जाते हैं। पौधे को सूखने से बचाने के लिए ही इस सिस्टम का इजाद किया गया है।
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इंजीनियरिंग कॉलेज की प्राचार्य डॉ. पुष्पलता ने कहा कि छात्रों ने बेहतर काम किया है। इस डिवाइस की जरूरत हर घर में है। अगर उपलब्ध कराया जाए तो स्टार्टअप के रूप में यह आगे बढ़ सकता है। बीईसी के सातवें सेमेस्टर के छात्रों ने बताया कि ग्लोबल सिस्टम फोर मोबाइल कम्युनिकेशन तकनीक, माइक्रो कंट्रोलर, ऑडिनो नैनो और नमी को पहचानने के लिए सेंसर लगाया जाता है। इसका फायदा यह होता है कि गमले में जब पानी की कमी होती है तो तत्काल इसकी सूचना मोबाइल पर आ जाती है और बता दिया जाता है कि मिट्टी में नमी की मात्रा कितना कम है। कितने पानी की आवश्यकता है। इससे न सिर्फ लोग अलर्ट रहेंगे, बल्कि समुचित पानी मिलने से गमले में रखा पौधा भी तरोताजा बना रहेगा।
जिला उद्यान पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि गमले में पौधा सूखने की मुख्य वजह में एक पानी की कमी और दूसरा न्यूट्रीशियन की कमी होती है। जानकारी के अभाव में पौधे सूख जाते हैं। अगर समुचित मात्रा में पानी और मौसम के अनुसार न्यूट्रीशियन उपलब्ध कराया जाए तो पौधे सूखेंगे नहीं। अगर छात्र सेंसर का इस्तेमाल कर इसकी सूचना लोगों के मोबाइल पर देंगे तो काफी संख्या में पौधे को सूखने से बचाया जा सकता है।

गमले का कारोबार बढ़ा, मगर पौधे सूख रहे
शहर में गमले का कारोबार बढ़ा है जो यह बताता है कि शहरवासी अपने घरों में फूल, सब्जी उगाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, मगर सही समय पर पौधे को अगर पानी नहीं मिलता है तो फिर समस्या बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सेंसरयुक्त डिवाइस बनाया गया है। छात्र निशांत ने बताया कि इस डिवाइस को गमले में आसानी से लगाया जा सकता है।
ऑनलाइन व ऑफलाइन डिवाइस किया जाएगा सेल:
छात्र निशांत बताते हैं कि इस डिवाइस को स्थानीय स्तर पर कुछ घरों में ट्रायल के रूप में दिया जाएगा। इसके बाद गमला विक्रेताओं को इसकी जानकारी दी जाएगी। अगर वे दिलचस्पी दिखाएंगे तो उनकी दुकान से बिकने वाले गमले में यह डिवाइस लगा दिया जाएगा। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बेचा जाएगा। बीते साल बीएयू के वैज्ञानिकों ने स्टार्टअप के तहत ऑनलाइन सेवा देने पर जोर दिया था। इसमें घर और खुले इलाके में पौधरोपण और उसकी देखभाल का दावा किया था।
