जिला परिषद अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस आने के बाद सरगर्मी तेज हो गयी है। दोनों पक्ष जहां सदस्यों को गोलबंद करने में लगे हैं। वहीं जिले के अफसर प्रावधानों की जानकारी ले रहे हैं।

रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहने के चलते जिला परिषद में किसी तरह की गतिविधि नहीं रही। लेकिन दोनों पक्ष सदस्यों से संपर्क करने में जुटे रहे। दोनों पक्ष वकीलों से कानूनी राय भी ले रहा है। लंबे समय बाद एक जिप अध्यक्ष के कार्यकाल में दो बार अविश्वास का प्रस्ताव आया है। इसके चलते इससे जुड़े लोग पंचायती राज विभाग के प्रावधानों की जानकारी ले रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अविश्वास प्रस्ताव का खेल एक दिन का महत्वपूर्ण हो गया है। वर्तमान जिप अध्यक्ष अनंत कुमार उर्फ टुनटुन साह ने 22 जून 2016 को शपथ ग्रहण किया था।

पंचायती राज के नियमों के अनुसार छह महीने पहले अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस नहीं दिया जा सकता है। इसे तहत 21 दिसंबर तक का समय बैठक के लिए बचता है। डीएम प्रणव कुमार ने कहा कि नियमों की जानकारी ली जा रही है। इसके बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। सरकारी अधिवक्ता गोपाल प्रसाद ने कहा कि पंचायती राज विभाग के प्रावधानों को देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। अपर लोक अभियोजक ओमप्रकाश तिवारी ने कहा कि छह माह के अंदर अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है। देखना होगा कि छह माह का समय कब पूरा होता है। पॉक्सो के विशेष लोक अभियोजक शंकर जयकिशन मंडल ने भी नियमों को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की।

जिप अध्यक्ष ने कहा कि अभी तक उन्हें अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस ही नहीं मिला है तो बैठक की तिथि कैसे तय की जा सकती है। कार्यालय से नोटिस मिलने के बाद वकीलों के सलाह लेंगे। उन्होंने कहा कि छह माह के अंदर नोटिस देने का प्रावधान नहीं है। दूसरा पक्ष अभी खुलकर सामने नहीं आ रहा है। लेकिन सदस्यों से संपर्क करने का सिलसिला जारी है। जिला परिषद में कुल 31 सदस्य हैं। प्रस्ताव पारित करने के लिए 16 सदस्यों का समर्थन चाहिए। इसके पूर्व तीन जनवरी 2019 को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया था। लेकिन 15 जनवरी को चर्चा को लेकर बुलायी गयी बैठक में 11सदस्य ही शामिल हो सके। इसके चलते दोनों पक्ष विशेष सावधानी बरत रहा है।

input:Hindustan

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By न्यूज़ डेस्क

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