भागलपुर : राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी ) विधेयक 2017 के खिलाफ आइएमए ने मोर्चा खोल दिया है. संगठन के आह्वान पर शनिवार को चिकित्सक धिक्कार दिवस मनाते हुए अपने क्लिनिक को बंद रखेंगे. इस आंदोलन के कारण जिले के 300 से ज्यादा निजी क्लिनिक बंद रहेंगे. वहीं मायागंज अस्पताल ओपीडी सेवा भी बंद रहेगी. हालांकि गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल और निजी क्लिनिकों में इमरजेंसी सेवा उपलब्ध रहेगी.


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जिला आइएमए अध्यक्ष डॉ एसपी सिंह ने कहा है बिल न केवल चिकित्सकों को परेशान करने वाली है बल्कि इसका असर आम गरीब छात्रों के साथ साथ मरीजों पर पड़ेगा. इसके विरोध में आइएमए लड़ाई लड़ रही है. डॉ सिंह ने कहा सरकार एमसीआइ को खत्म करने जा रही है. देश में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एमसीआइ लगातार अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करता है. जो जरूरी संसाधन जरूरी होता है उसकी पूर्ति कराने का प्रयास करता है.

इसकी रिपोर्ट के बाद सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार करती है. ऐसे महत्वपूर्ण संस्था को सरकार खत्म करना चाहती है. एमसीआइ को हटा कर इसे नौकरशाह के हाथ में देना चाहती है. इससे चिकित्सक चाह कर भी अस्पताल के लिए कुछ नहीं कर पायेंगे. क्योंकि सारी व्यवस्था नौकरशाह के हाथ में रहेगी. इस बिल के लागू होने से गरीब परिवार के बच्चे मेडिकल की शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकेंगे. क्योंकि 40 प्रतिशत सीट सरकारी संस्थानों के पास और 60 प्रतिशत निजी संस्था के हाथ में आ जायेगी.

नामांकन के लिए अंक का प्रतिशत भी बढ़ जायेगा. साथ ही मेडिकल पढ़ाई भी महंगी हो जायेगी. ऐसे में देश में चिकित्सक कम हो जायेंगे. मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलनी धीरे धीरे बंद हो जायेगी. छह माह का ब्रिज कोर्स करने के बाद आयुर्वेद, होम्योपेथी चिकित्सक भी एलोपेथी के माध्यम से मरीजों का इलाज करने लगेंगे.

By Rishav Mishra Krishna

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