श्रावणी मेले की तैयारी को लेकर निगम प्रशासन ने 25 जुलाई तक गंगा घाटों से लेकर शहर के चौक-चौराहे व कांवरियों के गुजरने वाले मार्गों की सफाई का दावा किया था, पर सच्चाई तो यह है कि अभी भी स्थिति जस की तस है। न ही घाटों की सफाई हुई और न ही नालों की उड़ाही ही हुई। इसके लिए योजनाएं भी बनीं थीं, निगम कर्मियों को जिम्मेदारी भी दी गई, लेकिन तय समय के मुताबिक आज समय सीमा खत्म हो गई।

घाटों की सफाई का तो आधा काम गंगा के पानी ने कर दिया। बाहरी हिस्से को भी प्रॉपर तरीके से नहीं बना पाया निगम। निगम प्रशासन का अमला कागजी घोड़ा दौड़ाने से ज्यादा आगे बढ़ नहीं सका है। वार्ड 29 की पार्षद खुशबू कुमारी ने बताया कि निगम प्रशासन को आवेदन दिए थे कि बरारी पुल घाट पर सबसे ज्यादा श्रद्धालु सावन व भादो में आते हैं। इसके लिए साफ-सफाई और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था जरूरी है। निगम ने कहा था कि 6 मजदूरों को एक महीने के लिए घाट पर दिए जाएंगे, रोशनी का भी प्रबंध होगा, लेकिन अबतक ऐसी व्यवस्था नहीं हो सकी है। उम्मीद है 25 को सामान्य बोर्ड की बैठक में शहर की सफाई का मुद्दा उठेगा।

दलदली घाट पर जंगली पौधे भी उग आए मुसहरी घाट पर आम तौर पर प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा रहती है। श्रावणी मेले में आसपास के शिव मंदिरों में जल चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं का जत्था आता है। इस घाट पर गंदगी तो पहले से है, दलदली घाट रहने के चलते जंगली पौधे भी उग आए हैं।

एसएम कॉलेज घाट से कांवरियों का जत्था बासुकीनाथ धाम जाने के लिए जल भरता है। घाट पर बैरिकेडिंग भी किया जाता है, जो अब तक नहीं हुआ। यहां घाट पर गंदगी पसरी हुई है। एसएम कॉलेज घाट की अब तक नहीं हुई बैरिकेडिंग प्रधान सचिव से सफाई की स्थिति को बताया था

मने तो प्रधान सचिव से सात जुलाई को शहर आगमन पर शहर की सफाई की स्थिति को बताया था। इसके बाद शहर में सफाई निगम प्रशासन ने ठीक नहीं की।

– सीमा साहा, मेयर

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By न्यूज़ डेस्क

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