रेलवे भर्ती बोर्ड लोको पायलट और तकनीशियन के पदों पर भर्ती के लिए नौ अगस्त को पहली बार कंप्यूटर आधारित परीक्षा लेगा। इन पदों पर पहली बार कंप्यूटर आधारित अॉनलाइन परीक्षा हो रही है। लेकिन, परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्र दूर बनाए जाने को लेकर बिहार के परीक्षार्थी खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि परीक्षाकेंद्र इतनी दूर बनाए जाने से उन्हें काफी परेशानी होगी।
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इस बारे में आज रेलवे भर्ती बोर्ड ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि कुछ आवेदकों ने परीक्षा अपने शहर से दूर अन्य राज्यों में परीक्षा केंद्र बनाए जाने की शिकायत की है। इस संबंध में परीक्षार्थियों को यह जानना जरूरी है कि इस परीक्षा के लिए 47 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इनमें से लगभग 34 लाख, यानि 71%से अधिक आवेदकों को 200 किलोमीटर के अंदर ही परीक्षा केंद्र दिए गए हैं।
विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि 99% दिव्यांगों और महिलाओं को 200 किलोमीटर के अंदर परीक्षा केंद्र दिए गए हैं।

इसी तरह 500 किलोमीटर के अंदर लगभग 83% यानि 40 लाख आवेदक समायोजित कर लिए गए हैं और केवल 17% आवेदकों को 500 किलोमीटर से अधिक दूरी के केंद्र आवंटित किए गए हैं।
कुछ राज्यों के आवेदकों की संख्या वहां उपलब्ध परीक्षा केंद्रों की क्षमता से बहुत ज्यादा है। जैसे बिहार से 9 लाख, उत्तरप्रदेश के 9.5 लाख तथा राजस्थान से 4.5 लाख आवेदक हैं। इन राज्यों में सीसीटीवी, फ्रिस्किंग और मेटल डिटेक्टर आदि की सुविधा वाले उपयुक्त परीक्ष केंद्रों की संख्या इतनी नहीं है।
इन तीनों राज्यों के जिन अभ्यर्थियों ने शुरू में आवेदन किया है उन्हें पास के परीक्षा केंद्र मिले हैं जबकि जिन्होंने बाद में आवेदन किया उनको ही दूर के केंद्र दिए गए हैं। उनके लिए यह भी ध्यान रखा गया है कि उन्हें बेहतर यातायात सुविधा वाले मुख्य शहरों में ही परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाएं।
कुल 26502 रिक्तियों में से 2292 रिक्तियां सिर्फ बिहार की हैं जबकि 24210 रिक्तियां भारत के अन्य क्षेत्रों कीे हैं। बिहार के अभ्यर्थियों ने 2292 रिक्तियों के अतिरिक्त देश के अन्य रेल भर्ती बोर्डों की रिक्तियों हेतु भी आवेदन किया है। इसलिए इन्हें उपलब्धता के अनुसार अन्य राज्यों के परीक्षा केंद्रों में भी आवंटित किया गया है।

