भागलपुर: जिले के सभी 421 मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की व्यवस्था अब शिक्षा विभाग की कड़ी निगरानी में रहेगी। बिहार शिक्षा परियोजना ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) को 1 जुलाई से 31 जुलाई तक जिले के प्रत्येक मान्यता प्राप्त निजी स्कूल का सघन निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही मिलने पर संबंधित विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बिहार शिक्षा परियोजना की ओर से निरीक्षण के लिए विस्तृत चेकलिस्ट जारी की गई है। अधिकारियों को निर्धारित अवधि के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट संबंधित शिक्षा कार्यालय में जमा करनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि स्कूलों की मान्यता, शैक्षणिक व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं की गहन पड़ताल की जाएगी।
डीपीओ (एसएसए) बबीता कुमारी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान विद्यालय प्रबंधन को सभी आवश्यक दस्तावेज मौके पर ही उपलब्ध कराने होंगे। जांच टीम स्कूल की मान्यता, संबद्धता, भवन, शिक्षकों की स्थिति और छात्रों के नामांकन से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से समीक्षा करेगी।

निर्देश के अनुसार प्रत्येक प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की टीम प्रतिदिन अपने क्षेत्र के कम से कम एक निजी विद्यालय का औचक निरीक्षण करेगी। इस दौरान यह भी देखा जाएगा कि विद्यालय ट्रस्ट या प्रबंधन समिति द्वारा संचालित है या नहीं तथा स्कूल स्वयं के भवन में चल रहा है या किराये के भवन में।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय की स्थापना वर्ष, मान्यता संख्या और सीबीएसई, आईसीएसई अथवा बिहार बोर्ड से संबद्धता संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक कक्षा में छात्रों की वास्तविक संख्या का मिलान किया जाएगा। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत आरक्षित सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के नामांकन की भी जांच होगी।
इसके अलावा शिक्षकों की संख्या, उनकी शैक्षणिक योग्यता, उपस्थिति और विद्यालय में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का भी भौतिक सत्यापन किया जाएगा। पेयजल, शौचालय, बिजली, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल मैदान तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की भी विस्तार से जांच होगी। अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट में प्रत्येक बिंदु पर स्पष्ट टिप्पणी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।

