मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। इसकी स्वतंत्रता की वकालत की जाती है। जनता स्वतंत्र मीडिया की हिमायती है, लेकिन कभी-कभी यह अपराधियों को रास नहीं आता। गलत काम करने वाले हमेशा यही चाहते हैं कि कोई उनके खिलाफ आवाज नहीं उठाये। इसके लिए बकायदा वे अपने बाहुबल और धनबल का भी इस्तेंमाल करते हैं।

स्वतंत्र, निर्भिक और निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकार किसी भी धमकी से नहीं डरते हैं। हमेशा सच के साथ खड़े रहते हैं। कलम की ताकत को जनता की आवाज बनाते हैं। भारत में कई ऐसे मौके आए हैं, जब मीडिया का गला घोंटने की कोशिश हुई। स्वतंत्र व बेखौफ मीडिया को खौफजदा करने के प्रयास भी कम नहीं हुए।

पत्रकारों पर हमले की बात नयी नहीं है। आये दिन असमाजिक तत्व पत्रकारों को निशाना बनाते रहते हैं। कभी खबर को कवर करने गये पत्रकारों पर हमले कर दिये जाते हैं तो कभी खबर न लिखने के लिए धमकी दी जाती है। चौथे खंभे के इन प्रहरियों को किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं दी गई है। इसके बावजूद ये अपनी कलम को हथियार बनाकर हमेशा सच्चाई के साथ खड़े रहते हैं। कलम की धार ही इनकी पहचान है।
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By न्यूज़ डेस्क

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