नवगछिया : बिहार के तीन जिलों पूर्णियां, मधेपुरा और भागलपुर की सीमा को छूने वाले ढ़ोलबज्जा बाजार में आपको नेता जी सुभाष चंद्र बोस चौक तो मिल जायेगा लेकिन नेता जी आपको ढ़ूढ़ने से भी नहीं मिलेंगे. बताना जरूरी है कि विजय घाट पर पक्का पुल निर्माण की मांग को लेकर नेता जी सुभाषचंद्र बोस के जन्म दिवस 23 जनवरी 1987 को कोसी पार के ग्रामीणों ने नेता जी सुभाष चंद्र बोस को प्रेरणास्त्रोत मान कर ढ़ोलबज्जा बाजार में नेता जी की प्रतिमा स्थापना कर लोगों ने संघर्ष का बिगुल बजाया था. आज लोगों के मुद्दों को मुकाम मिल गया है.  बाबा बिशु राउत सेतु के रुप में विजय घट का पक्का पुल बन कर तैयार है. ढोजबज्जा बाजार भी दिनों दिन विस्तृत हो रहा है. ऐसा नहीं कि अब सुभाष चौक का अस्तित्व समाप्त हो गया है. सुभाष चौक भी वहीं का वहीं है. लेकिन अगर नहीं है तो नेता जी सुभाष चंद्र बोस की वह प्रतिमा जो लोगों के लंबे और सफलतम संघर्ष की कहानी को बयान करता था.


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आखिर कहां गयी नेता जी प्रतिमा

पिछले वर्ष मई माह में एक वाहन के धक्के से नेता जी की प्रतिमा को तोड़ दिया गया. प्रतिमा कई दिनों तक मलवे के रुप में पड़ा रहा. लेकिन किसी का ध्यान नहीं गया. फिर धीरे धीरे उक्त स्थल से प्रतिमा का नामो निशान गायब हो गया. प्रतिमा टूटने के साथ ही ग्रामीणों ने नेता जी की प्रतिमा पुन: स्थापित करने की मांग की लेकिन किसी प्रकार की प्रशासनिक पहल नहीं होने 6पर नेता जी प्रतिमा फिर नहीं लग सकी. इन दिनों कई ग्रामीणों के साथ बिहार प्रदेश छात्र संघर्ष समिति के युवक पुन: प्रतिमा स्थापना को लेकर मुहिम चलाये हुए हैं. जिले के छोटे से ले कर बड़े प्रशासनिक पदाधिकारियों को पुन: प्रतिमा स्थापना को लेकर लिखित आवेदन भी भेजा गया है. लेकिन अब तक युवकों व ग्रामीणों की टोली को सफलता नहीं मिली है.

सुभाष चौक से ही रखी गयी थी पुल निर्माण को लेकर संघर्ष की नींव

नवगछिया के कोसी पार के लोगों का कहना था कि उन लोगों को अंग्रेजों से तो बहुत पहले ही आजादी मिल गयी थी लेकिन यातायात के आभाव के कारण इलाक ा कई तरह की समस्याओं के दाशतां में जकड़ा हुआ था. सुबह सूरज की पहली पौ फूटते है लोगों की समस्याएं शुरू हो जाती थी. इसका सबसे बड़ा कारण था यातायात का आभाव. पूरा इलाका कोसी नदी से घिरा था. लगभग 30 वर्ष पहले 23 जनवरी 1987 को ग्रामीणों ने योगेंद्र सरकार के नेतृत्व ढोलबज्जा बाजार में नेता जी सुभाषचंद्र बोस को प्रेरणास्त्रोत मान कर उनकी प्रतिमा की स्थापना की और विजय घाट पक्का पुल संघर्ष समिति का गठन कर सर्वप्रथम 13 दिनों के आमरण अनशन किया. इस आंदोलन में संत ज्ञान स्वरुप तपस्वी भी शामिल थे. नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्य नंदनी सरकार उस वक्त नौ वर्ष की थी और वह भी अपने पिता के साथ 13 दिनों के अनशन पर थीं. आज योंगेंद्र सरकार बुढ़ापे की वजह से शरीर से लाचार हो चुके हैं. जिला पार्षद नंदनी सरकार कहती है कि 13 दिनों के अनशन के बाद आंदोलन ने तब तक जारी रहा जब तक पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ. नंदनी सरकार कहती हैं कि आंदोलन से जुड़े लोग जब भी बिना नेता जी के सुभाष चौक को देखते हैं तो ऐसे लोग उनके पास आ कर अपने दिल के दर्द को जरूर बयान करते हैं. नंदनी सरकार कहती हैं कि एक बार फिर से सुभाष चौक पर नेता जी की प्रतिमा स्थापना के लिए वे भी मुहिम चला रही हैं. अगर प्रशासनिक सहयोग मिला तो जल्द ही सुभाष चौक पर एक बार फिर से नेता जी दिखने लगेंगे. ढोलबज्जा पंचायत के मुखिया राजकुमार मंडल उर्फ मुन्ना, चंदन कुमार, दीपक कुमार, बबलू कुमार, सुभाषित कुमार, प्रभाष कुमार, प्रिंस कुमार, अमोल कुमार, अजीत कुमार, प्रशांत कुमार कन्हैया आदि अन्य ग्रामीण भी प्रतिमा स्थापना को लेकर प्रशासन का ध्यान लगातार आकृष्ट कर रहे हैं.

कहते हैं बीडीओ

नवगछिया के बीडीओ राजीव कुमार रंजन ने कहा कि प्रतिमा की पुन: स्थापना ग्राम सभा के माध्यम से भी किया जा सकता है. ग्रामीण तैयार हों तो वे उनके साथ हैं.

By Rishav Mishra Krishna

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