ढोलबज्जा: एक ओर सरकार बिहार में बाहर शौच से मुक्त को लेकर, जन जागरूकता अभियान चला रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ गांवों में दर्जनों ऐसे महादलित परिवारों को इससे मिलने वाले लाभ से वंचित कर दिए जा रहे हैं. जिन्हें पहले पीएचईडी के द्वारा शौचालय का लाभ मिला था. ऐसे में स्वच्छ बिहार की सपना देखना मील के पत्थर साबित होंगे. ज्ञात हो कि गुरुवार के दिन नवगछिया प्रखंड के कोसी पार, खैरपुर कदवा पंचायत अंतर्गत वार्ड नंबर एक में, शौचालय सर्वेक्षण का कार्य किया गया. जहां 180 परिवारों को शौचालय निर्माण हेतु सूची में नाम जोड़ा गया तो वहीं 22 गरीब महादलित परिवारों को इससे मिलने वाल लाभ के रूप में राशि से वंचित कर दिया गया.
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मालूम हो कि ये वह महादलित परिवारों हैं जिनका शौचालय निर्माण 2009 ईस्वी में एनजीओ के द्वारा ठेकेदार बहाल कर, बीपीएल परिवारों से 300 व अन्य एपीएल परिवारों से 500 रुपए लेकर बनाया गया था. जिसमें घटिया मटेरियल से निर्माण कार्य किए जाने की वजह से अब वह सभी शौचालय स्वत: ढह कर गिर पड़ गए हैं. ऐसे गरीब महादलित लाभुकों को अब मुख्यमंत्री सात निश्चय के तहत, इसका लाभ नहीं दिए जाने की बात कही जा रही है. कदवा इलाके के ऐसे सैकड़ों महादलित परिवारों का नाम सर्वेक्षण सूची से हटा दिए गए हैं.
सरकार के इस फैसले से वासुदेव रजक, शिवचरण रजक, दिनेश रजक व चन्द्रदेव रजक के साथ एक हीं गांव के दर्जनों महादलित परिवार दंग है. उन सभी ने बताया कि हमलोगों से दो सौ-तीन सौ रुपए लेकर, जो शौचालय एनजीओ के द्वारा बनवाया गया था उसका उपयोग एक साल भी नहीं कर पाये.

कमजोर ईंट व घटिया मेटेरियल के निर्माण किए जाने से वह सभी गिर पड गए. जब उचित पैसा देकर शौचालय बनवाने की घडी आई तो, सरकार हमलोगों के साथ शौतेला व्यवहार कर रहे हैं. उक्त बातों को लेकर प्रखंड से आए सर्वेक्षण कर्ता संजीत कुमार ने भी बताया कि जिन सभी 22 परिवारों को शौचालय का लाभ पहले 2009 में मिल चुके हैं, अब उन्हें इस योजना के तहत, इसका लाभ मिलने की कोई संभावना नहीं है. फिर भी इन लाभुकों का नाम अलग से लिखकर बरीय अधिकारी से दरखास्त किया जाएगा. इससे पहले मैं कुछ नहीं कह सकता.

