भागलपुर।: साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला स्थित साइबर क्राइम यूनिट में नौ पद सृजित किए गए हैं। इन पदों पर जल्द बहाली होगी। इसमें सहायक निदेशक (लेवल-7) के तीन पदाधिकारी, वरीय वैज्ञानिक सहायक (लेवल-6) के चार और प्रयोगशाला वाहक (लेवल-2) के दो पद सृजित किए गए हैं। सरकार के उपसचिव दुर्गेश कुमार पांडेय ने पदों के सृजन संबंधी स्वीकृति के लिए पत्र जारी किया है।
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शराब सैंपल की जाच के लिए भी बनाई गई है लैब
राज्य में शराब से जुड़े मामलों की जाच करने के लिए भागलपुर में क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला में सेंटर के गठन को भी मंजूरी दी गई थी। इसके गठन के बाद सरकार ने इसके लिए भी दो पदों का सृजन किया है। सरकार के उप सचिव दुर्गेश कुमार पांडेय ने इस संबंध में पत्र जारी कर दिया है। पद सृजन के बाद जल्द ही बहाली होगी। ताकि शराब से जुड़े सैंपल की जाच के लिए उचित व्यवस्था हो सके।

शराबबंदी कानून के बाद बड़ी संख्या में शराब के कई तरह के सैंपल जाच के लिए पटना भेजे जा रहे थे। मगर अब इसकी जांच भागलपुर में होगी। ऐसे में भागलपुर में लैब स्थापित होने के बाद आसपास के जिलों को भी जांच में काफी सहूलियत होगी।
केस निष्पादन में होती है समस्या
वर्तमान में बिना मानक के पुलिस वालों की तैनाती साइबर सेल में कर दी जाती है। कई जिलों में इसे मुख्य धारा की पुलिसिंग से हटाकर साइड लाइन या शटिंग पोस्टिंग के तौर पर भी उपयोग किया जाता है। ऐसी स्थिति में साइबर क्राइम से जुड़ मामलों में कोई अनुसंधान जिला स्तर पर नहीं हो पाता है। मामले लंबित रह जाते या राज्य स्तर पर इसके लिए जांच एजेंसी ईओयू (आर्थिक अपराध इकाई) को ट्रासफर कर दिये जाते हैं। इस तरह की समस्या से निजात पाने और साइबर क्राइम के मामलों का निपटारा गंभीरता से करने के लिए यह पहल की गई है।
20 मार्च को कैबिनेट में हुआ था फैसला
पटना में आयोजित कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उक्त प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाई थी। जिन जिलों के साइबर क्राइम यूनिट के लिए सहमति मिली थी उसमें पटना, भागलपुर और मुजफ्फरपुर शामिल था। इन जिलों में स्थित एफएसएल की यूनिटों में साइबर क्राइम यूनिट का गठन किया गया है।


