बिहार के लाल प्रो. डाॅ. ओमप्रकाश भारती फीजी में भारत के सांस्कृतिक राजनयिक बनाए गए हैं। बतौर कल्चरल एंबेसडर वह विदेश मंत्रालय के अधीन फिजी के भारतीय दूतावास में इंडियन काउंसिल आॅफ कल्चरल रिलेशन के यूनिट स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक होंगे। वहां वह वैश्विक परिदृश्य में भारत का सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत सरकार ने उन्हें अगले तीन साल के लिए प्रथम सचिव व भारतीय राजनयिक स्तर के इस पद पर नियुक्त किया है। गुरु पूर्णिमा के दिन शुक्रवार को उन्होंने नई दिल्ली में फीजी के उच्चायुक्त के साथ मीटिंग के दौरान भारतीय राजनयिक का प्रभार लिया।
बिहार में सहरसा जिला के एक छोटे से गांव मनखाही में पांच सितंबर 1968 को जन्में प्रो. भारती अबतक महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी हिंदी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में फिल्म एवं प्रदर्शनकारी कला विभाग के विभागाध्यक्ष थे। लोक कलाविद्, कला इतिहासकार, लेखक व अकादमिशियन प्रो. भारती ने गांव में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद पटना विश्वविद्यालय से नाट्यकला और साहित्य में अलग-अलग पीजी करने के दौरान स्वर्ण पदक प्राप्त किया। वहीं से बिहार की लोक कला नटुआ नाच में पीएचडी पूरी करने के बाद वर्ष 1996 में भारतीय संगीत नाटक अकादमी से अपने कला प्रशासन के कैरियर की शुरुआत की और उसके बाद कई पुस्तकों का लेखन, नाटकों की रचना, कला सम्मान से सम्मानित होते हुए आज भारतीय राजनयिक बने।

#कला_व_संस्कृति_के_क्षेत्र_में_महत्वपूर्ण_योगदान

कला व संस्कृति के क्षेत्र प्रो. ओमप्रकाश भारती भारती जाने-माने व्यक्तित्व हैं। वह इससे पूर्व संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत पूर्व क्षेत्र सांस्कृृतिक केंद्र, कोलकाता के निदेशक रह चुके हैं। साथ ही उत्तर पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, दीमापुर(नागालैंड) और जवाहर लाल नेहरू मणिपुरी नृत्य अकादमी, इंफाल(मणिपुर) में निदेशक रहे। इससे पूर्व संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली में वह उप सचिव (नाट्य) और उपसचिव(लोक एवं जनजातीय कला) के बतौर कार्यरत रहे। इसके अलावे संगीत नाटक अकादमी, पूर्वोत्तर भारत केंद्र, शिलांग(मेघालय) में भी बतौर उपसचिव सेवा दी।

#सैकड़ों_उत्सव_आयोजित_किए_डेढ़_लाख_गांवों_में_भेजा_कला_जत्था

कला प्रशासक के विभिन्न पदों पर रहते हुए प्रो भारती आॅक्टेव महोत्सव, पूर्वोत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक मेला, आदि विंब महोत्सव जैसे 800 से ज्यादा सांस्कृतिक आयोजन करवा चुके हैं। गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री से बंगाल की खाड़ी तक 3200 से ज्यादा कलाकारों की सहभागिता वाले गंगा संरक्षण यात्रा, तवांग में आयोजित राष्ट्रीय महोत्सव और 92 दिनों चले कोलकाता थियेटर फेस्टिवल काफी चर्चित रहा। इसके अलावे पूर्वोत्तर के डेढ़ लाख गांवों में कला जत्था भेजकर उन्होंने संस्कृति से ग्रामीणों का परिचय कराया।

#कई_पुस्तकें_लिखी_विश्व_संग्रहालय_की_स्थापना_की

प्रो भारती का कला के साथ-साथ अकादमिक जगत में भी योगदान रहा। नदियां गाती है, बिहार के पारंपरिक नाट्य के साथ-साथ कला, संस्कृति, गीत आदि पर उन्होंने डेढ़ दर्जन से ज्यादा पुस्तकें लिख डाली। कोसी पर केंद्रित उनकी रचना बांध टूटने दो को मौलिक लेखन के लिए मोहन राकेश सम्मान मिला। इजेडसीसी के निदेशक रहते उन्होंने कोलकाता में आदि विंब वाद्य विथिका संग्रहालय की स्थापना की। इसके अलावे पश्चिम बंगाल के बागडोगरा में हिमालय अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय की भी स्थापना की। उन्हें 2007-08 इंदिरा गांधी राजभाषा सम्मान मिला था। इसके अलावे 2007 में बिलासा लोक साहित्य सम्मान, 2008 में सेरा पंच सम्मान और 2009 में पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी सम्मान से नवाजा जा चुका है।

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By न्यूज़ डेस्क

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