सूबे के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की कवायद अगले वर्ष फरवरी-मार्च से शुरू हो जाएगी। रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से होंगी। शिक्षा विभाग ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग नियमावली 2018 का प्रारूप तय कर लिया है और इसे वित्त विभाग की सहमति के लिए भेजा गया है। संभावना जताई जा रही है कि नवंबर के अंत तक आयोग अस्तित्व में आ जाएगा।
पिछले वर्ष ही आयोग गठन की मिली अनुमति
राज्य सरकार ने पिछले वर्ष ही विवि सेवा आयोग गठन की अनुमति दी थी। बाद में इसमें आंशिक संशोधन किया गया और विधानमंडल से इसे पारित कराया गया। पुराने प्रस्ताव में सभी प्रकार की नियुक्तियां थी जिसे संशोधित करते हुए नई नियुक्तियां शब्द को शामिल किया गया।

आयोग में होंगे एक अध्यक्ष और छह सदस्य
यह तय हो गया है कि आयोग कैसे कार्य करेगा और इसके दायित्व क्या होंगे। तय प्रारूप पर वित्त विभाग की मंजूरी मिलते ही इसे मंत्रिमंडल की सहमति के लिए भेजा जाएगा। संभावना है कि नवंबर से आयोग काम करेगा। आयोग में एक अध्यक्ष और अधिकतम छह सदस्य होंगे।
साढ़े आठ हजार पदों पर नियुक्तियां करेगा आयोग
बिहार विवि सेवा आयोग विवि में रिक्त पड़े तकरीबन साढ़े आठ हजार पदों पर नियुक्तियां करेगा। यहां बता दें कि 2014 में सरकार ने बिहार लोक सेवा आयोग को विश्वविद्यालय शिक्षकों के 3354 रिक्त पदों पर नियुक्ति की अधियाचना भेजी थी। जिसमें से बीपीएससी ने तकरीबन 17 सौ पदों पर नियुक्तियां कर ली हैं।

शेष 34 सौ पदों पर भर्ती की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इन पदों पर नियुक्ति होने के बाद भी विवि में करीब साढ़े आठ हजार पद रिक्त रह जाएंगे। जिन पर नवगठित आयोग नियुक्ति करेगा।
कौन हो सकेगा आयोग का अध्यक्ष
आयोग के अध्यक्ष पद का जिम्मा मुख्य सचिव के समकक्ष या भारत सरकार में सचिव के समकक्ष पद पर कार्यरत या सेवानिवृत अधिकारी या शिक्षाविद् या पूर्व कुलपति को दिया जाएगा। आयोग के छह सदस्यों में आधे सदस्य विश्वविद्यालय के प्राचार्य होंगे। इनके लिए पांच वर्ष का अनुभव आवश्यक शर्त होगा।
अन्य सदस्यों में शिक्षाविद् और राज्य सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के वेतनमान में काम करने वाले अधिकारी होंगे। अध्यक्ष व सदस्यों के कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष का होगा। अध्यक्ष की सेवा निवृति की अधिकतम आयु 72 वर्ष और सदस्यों की 70 वर्ष होगी।


