नवगछिया : पचगछिया गांव के दुर्गा मंदिर में अनोखे अंदाज में देवी की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्र में जहां पर दसों दिन अनवरत दीप प्रज्वलित रखने की अनोखी परंपरा आज भी कायम है. नवरात्रि में दीपक का बुझ जाना यहां अशुभ माना जाता है. हालांकि आज तक नवरात्रि में दीपक अखंड रूप से जलता रहा है.
माता का अनोखा दरबार, भक्त के विश्वास को आज तक मैया ने रखा है जिंदा
ग्रामीण एक वर्ष हुए वाकये का जिक्र करते हुए बताते हैं कि उस वर्ष भयानक आंधी तूफान आया था लोगों को आशंका थी की मंदिर की खिड़कियां पूरी तरह से खुली है, अभी तक मंदिर निर्माणाधीन था, इसलिये दीपक बुझना तय है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं भयानक आंधी तूफान में भी दीप अखंड जलता रहा. यहां पर देवी दुर्गा की संगमरमर की बनी प्रतिमा की स्थापना सन 1955 में इस गांव के ही जमींदार युधिष्ठिर प्रसाद सिंह एवं तिलकधारी सिंह और उनके वंशजों ने बनवाई थी.

शिव प्रसाद सिंह जो संस्थापक परिवार के सदस्य हैं का कहना है कि मंदिर की स्थापना का उद्देश्य धर्म के प्रति झुकाव के साथ-साथ आत्मरक्षा तथा पारिवारिक उत्थान की भावना से था. स्वर्गीय राम नारायण सिंह जो कि मंदिर के संस्थापक थे को स्वप्न हुआ कि कलश पूजा किया जाए तो उन्होंने अपने स्वर्गीय कुंदन कुमार के सहयोग से एक झोपड़ी में कलश पूजा प्रारंभ किया. शारदीय नवरात्र में यहां पर कई तरह के भक्ति में आयोजन किए जाते हैं.


