भागलपुर में बर्ड फ्लू की आशंका दिनोंदिन गहराती जा रही है। बीते दिनों कौवे की मौत के बाद नये घटनाक्रम में एक के बाद एक कर लगभग 100 मुर्गे की मारे जाने से लोग दहशत में हैं।
गोराडीह प्रखंड के पिथना गांव में बीते चार दिनों में 100 से अधिक मुर्गों की मौत हो चुकी है। लोगों को आशंका है कि बर्ड फ्लू के कारण ही मुर्गे की मौत हो रही है।
खास यह कि ये मुर्गे किसी पॉल्ट्री फॉर्म के नहीं बल्कि देसी नस्ल के मुर्गे हैं। इसलिए इसके बढ़ने का खतरा अधिक है। पिथना गांव में बड़ी संख्या में मुर्गे की मौत की जानकारी अभी पशुपालन विभाग को नहीं मिली है। देर शाम जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. राजेन्द्र कुमार ने बताया कि किसी ने वहां से जानकारी नहीं दी है। बावजूद इसके सोमवार की सुबह पशुपालन विभाग की टीम पिथना जाएगी। वहां पल रहे मुर्गे की जांच कर सीरम लिया जाएगा ताकि लैब में भेजकर जांच करायी जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले दो-चार मुर्गे ही मरे थे। तब ऐसी आशंका नहीं हुई लेकिन उसके बाद संख्या बढ़ने लगी। कुछ मुर्गियां घर के बाहर सड़क पर भी मरी मिलीं तो कुछ की पिंजरे में मौत हो गई। जानकारी के अभाव में लोग मुर्गे जहां-तहां फेक रहे हैं। एक ग्रामीण ने बताया कि मो. राशिद के 50, मो. शहवाज के 10, जक्कू के घर 10, जीनत के नौ, शदाकत के आठ, बीबी अंजरी के 12, इकराम के आठ मुर्गे की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोगों ने देर शाम इसकी जानकारी बीडीओ प्रभात केसरी को भी दी है। बता दें कि इससे पहले भागलपुर शहर में तीन कौए की भी मौत हो चुकी है जिसकी जांच कोलकाता में करायी जा रही है। कई प्रखंडों से मुर्गे के सीरम की जांच के लिए सैम्पल भेजे गए हैं। बुधवार तक रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
मृत पक्षी को गड्ढा खोदकर मिट्टी के अंदर डालें
पशुपालन विभाग के डॉक्टरों ने बताया कि अभी बर्ड फ्लू की आशंका है। इसलिए किसी भी पक्षी या मुर्गे को मरने के बाद खुले न छोड़ें न ही फेकें। मृत पक्षी को हाथ से छूना भी नहीं चाहिए। गड्ढा खोदकर किसी लाठी डंडे के सहारे मृत पक्षी को उसमें डाल ऊपर से मिट्टी डाल दें ताकि उसका मांस खाकर किसी दूसरे पक्षी को संक्रमण होने का खतरा न रहे।


