खरीक: बासा पर सो रहे वृद्ध किसान की अपराधियों ने पहले लाठी-डंडे से पिटाई की और फिर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। वारदात नवगछिया नदी थाना क्षेत्र के गुवारीडीह-मड़वा बहियार में गुरुवार देर रात की है। शुक्रवार सुबह बहियार में मवेशी चराने गए कुछ चरवाहों की नजर किसान के शव पर पड़ी।
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लोगों ने उसकी पहचान बिहपुर के मड़वा निवासी उमेश राय उर्फ मुसो राय (65) के रूप की। किसान के शरीर में कई जगह गंभीर चोट और गले पर निशान थे। कान व नाक से खून बह रहा था। इससे प्रतीत होता है कि बदमाशों ने पहले किसान की पिटाई की और फिर बाद गला दबाकर मार डाला। चरवाहों की सूचना पर किसान के परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। इसके बाद वहां लोगों की भीड़ जुट गई। परिजनों की सूचना पर नवगछिया नदी थानाध्यक्ष दिलीप कुमार, बिहपुर थानाध्यक्ष रंजीत कुमार, झंडापुर ओपी प्रभारी पंकज कुमार, भवानीपुर ओपी प्रभारी नीरज कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की तहकीकात की। लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा।

इसके बाद पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए नवगछिया अनुमंडल अस्पताल भिजवा दिया। नदी थाने में मृतक की पत्नी नंदनी देवी के बयान पर पुलिस ने अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। नदी थानाध्यक्ष दिलीप कुमार ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।जल्द ही पुलिस अपराधियों तक पहुंचेगी। घटना के बाद इलाके के किसानों में दहशत है। शुक्रवार देर शाम परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
उमेश की हत्या के बाद पत्नी और बेटों का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतक किसान दो पुत्र व एक विवाहित पुत्री है। बड़ा बेटा संतोष राय खेती करता है और छोटे बेटा सुमन बीए प्रथम वर्ष का छात्र है।

मड़वा के किसानों की कई बीघा जमीन पर हरिओ के कुख्यातों का है कब्जा पुलिस भले ही किसानों के घर तक फसल सुरक्षित पहुुंचाने का दावा करती है, लेकिन सच यह है कि आज भी गुवारीडीह-मड़वा बहियार की कई बीघा जमीन पर हरिओ के कुख्यातों का कब्जा है। किसान उनके भय से अपना मुंह तक नहीं खोल रहे हैं। मृतक किसान उमेश राय के भी कुछ जमीन पर बदमाशों का कब्जा है। ग्रामीणों में चर्चा है कि मृतक के जिस जमीन पर अपराधियों का कब्जा है वहां तैयार मक्के की फसल बोरा में भरकर रखा हुआ था। हो सकता है कि रात में इसी को लेकर अपराधियों से पहले विवाद हुआ होगा और फिर बदमाशों ने किसान की हत्या कर दी हो।

बेटे ने कहा हमारी किसी ने दुश्मनी नहीं है
मृतक उमेश राय के बड़ा बेटा संतोष राय रो-रोकर कह रहा था कि हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। पापा तो किसी से तेज आवाज में बात तक नहीं करते थे। फिर भी अपराधियों ने पापा को मार डाला। वहीं ग्रामीण अपराधियों के भय से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। उमेश राय लंबे समय से बासा पर रहकर खेती करने के अलावा मवेशी पालता था। किसान की हत्या क्यों हुई इस बारे में परिजन और ग्रामीण कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं। वारदात के बाद लोगों में अपराधियों का भय इस कदर है कि वे चुप रहना ही मुनासिब समझ रहे हैं।

