नवगछिया के नया टोला स्थित श्री महंत वैदेही शरण संस्कृत कॉलेज का भवन जर्जर होने के कारण यहां के छात्रों को शिक्षक ठाकुरबाड़ी में पढ़ा रहे हैं। 1984 में संस्कृत कॉलेज की स्थापना की गई थी। कॉलेज में खगड़िया, कटिहार और पूर्णिया जिलों के छात्र भी पढ़ते हैं। कॉलेज को 2 बीघा जमीन है। 11 कमरों वाला कॉलेज का भवन अब खंडहर में तब्दील हो गया है। शाम ढलते ही परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है। महाविद्यालय में 220 छात्रों का नामांकन है जिसमें उप शास्त्री में 65 और शास्त्री में 150 छात्र हैं। ठाकुरबाड़ी में जगह कम रहने के कारण कुछ छात्रों को ही शिक्षा मिल पा रही है। इन छात्रों को पढ़ाने के लिए मात्र 4 शिक्षक हैं। महाविद्यालय में छात्रों के लिए लाइब्रेरी की व्यवस्था है।
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जिसमें 2000 पुस्तकें हैं। मगर बाढ़ के कारण सभी किताबें ठाकुरबाड़ी में ही पड़ी हैं। अनुदानित कॉलेज होने के कारण शिक्षकों को 2014 के बाद वेतन नहीं मिला है। वेतन की आस में कई शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। सेवानिवृत्त प्रोफेसर बुद्धि प्रसाद सिंह ने बताया कि 2014 से अब तक उन्हें पैसा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अगर आने वाले भविष्य में कॉलेज को सरकार द्वारा मान्यता मिलती है ताे छात्रों और कॉलेज का भविष्य सुधरेगा।
प्राचार्य बोले-मूलभूत सुविधाओं के अभाव में घट रही है
कॉलेज के शासी निकाय के अध्यक्ष डॉ. गोविंद झा, सचिव प्रवीण कुमार भगत, शिक्षक प्रतिनिधि सुनील त्रिपाठी, सदस्य एमएलसी संजीव कुमार, नवगछिया एसडीओ और दाता सदस्य सीताराम ठाकुर शामिल है। काॅलेज के प्राचार्य डॉ. बुद्ध प्रकाश ठाकुर ने बताया कि छात्रों की उपस्थिति कम है। इससे आसपास के क्षेत्र का एकमात्र संस्कृत महाविद्यालय अपनी दुर्दशा पर रो रहा है।

उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में कुछ समस्याएं हैं जिस कारण यहां छात्र नहीं आ पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी भी महाविद्यालय के लिए कष्टकारी है। सचिव प्रवीण कुमार भगत ने बताया कि सबसे जरूरी काॅलेज की चहारदीवारी बनवाना और शिक्षक-कर्मचारियों की भर्ती है। उन्होंने कहा कि मूलभूत सुविधाओं के कारण भी कॉलेज की स्थिति खराब है।
