बिजली वितरण कंपनियों ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए बिजली दरों में समेकित रूप से 10 फीसद वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। वितरण कंपनियों के प्रस्ताव को अगर बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने मान लिया तो अप्रैल से उपभोक्ताओं को झटका लगना तय है।

हालांकि प्रस्ताव के मुताबिक छोटे उपभोक्ताओं को कुछ राहत भी दी गई है। शहरी क्षेत्र में प्रथम सौ यूनिट बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं की बिजली दरें कम करने का प्रस्ताव है। इसी तरह ग्र्रामीण क्षेत्रों में प्रथम 50 यूनिट तक बिजली खपत करने वालों को भी राहत मिल सकती है।

पिछले साल कंपनियों के प्रस्ताव पर आयोग ने बिजली दरों में 55 फीसद का इजाफा किया था, जिसे बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2952 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर बढ़ी हुई दरों को 20 फीसद तक कर दिया था। माना जा रहा है कि इस वर्ष भी आयोग द्वारा नई दरें तय होने के बाद राज्य सरकार की ओर से उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी का एलान किया जाएगा।

कब कितनी बढ़ी दरें

2017-18 : 20 फीसद (सब्सिडी के बाद)

2016-17 : वृद्धि नहीं

2015-16 : 2.5 फीसद

2014-15 : वृद्धि नहीं

2013-14 : वृद्धि नहीं

2012-13 : 6.9 फीसद

2011-12 : 12.1 फीसद

2010-11 : 19 फीसद

2009-10 : पांच पैसा

अभी कितनी है दरें 

शहरी घरेलू उपभोक्ता

यूनिट : दरें

शून्य से 100 यूनिट : 4.27 रुपये

101 से 200 यूनिट : 5.02 रुपये

201 से 300 यूनिट : 5.77 रुपये

300 यूनिट से ज्यादा : 6.52 रुपये

ग्रामीण घरेलू (मीटर वाले)

यूनिट : दरें

शून्य से 50 यूनिट : 265 रुपये

51 से 100 यूनिट : 2.90 रुपये

100 से ज्यादा : 3.15 रुपये

बिना मीटर : 267.50 रुपये फिक्स

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By न्यूज़ डेस्क

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