20 सितंबर 2012 को बांका जिले के जयपुर क्षेत्र स्थित रसोइया गांव की एक प्रेम कहानी ने सबको स्तब्ध कर दिया। गांव में चार बच्चों की मां चुड़की मुर्दे के साथ शादी रचाकर पूरे देश में सुर्खियों में आई थीं। लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे इस जोड़े के लिए ग्राम प्रधान का निर्णय किसी अजूबे से कम नहीं था। लेकिन, यह साहसिक कदम चुड़की एवं उनके चारों बच्चों के लिए बड़ा वरदान साबित हुआ। मुर्दे से शादी रचाने के बाद चारों बच्चों को पिता का नाम व चुड़की को पत्नी का दर्जा मिल गया।

जागरण की पहल के बाद आया आइडिया

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर ने फिल्म निर्देशक आजाद आलम का ध्यान खींचा। उन्होंने मुंबई से ही दूरभाष के माध्यम से इस घटना से संबंधित आवश्यक तथ्य जुटाए। आजाद विश्वरूप, करन जौहर, वॉर, द गाजी अटैक समेत मानव मूल्यों पर आधारित कई फिल्में बना चुके हैं।

उन्हीं के निर्देशन में मेलोड्रामा इंटरटेनमेंट कंपनी के बैनर तले यह फिल्म बनाई जाएगी। पिछले महीने आजाद ने अपनी टीम के साथ रसोइया गांव का दौरा किया। उन्होंने चुड़की के साथ भी बातचीत की। जयपुर की वादियों में इस फिल्म की शूटिंग की जाएगी। अक्टूबर या नवंबर में फिल्म की शूटिंग शुरू हो सकती है।

पंचों ने दिलाया था अधिकार

चुड़की व महालाल एक-दूसरे से प्रेम करते थे। गरीबी के कारण दोनों शादी नहीं कर सके, लेकिन एक साथ ही रहते थे। इसी बीच मजदूर महालाल बीमार पड़े और उनकी मौत हो गई। महालाल के भाई ने घर-संपत्ति से चुड़की व उसके बच्चों को बेदखल करना चाहा। इसके बाद पंचायत ने चुड़की को महालाल के शव के साथ शादी करने का फैसला सुनाया। शादी के बाद चुड़की और उसके बच्चों को समाज ने स्वीकार कर लिया।

शादी के बाद ही तोड़ दीं चूडिय़ां

पंचों के प्रयास से चुड़की की मांग में महालाल के शव से सिंदूर भरवाया गया। मांग भरने के बाद ही चुड़की ने अपनी चूडिय़ां तोड़ दीं और विधवा हो गई। ऐसी हृदय विदारक शादी संसार में कम ही हुई होगी। विडंबना यह रही कि चुड़की को महालाल के नाममात्र के श्राद्ध के लिए भी लोगों के आगे हाथ फैलाना पड़ा।

महालाल व चुड़की हेंबम चार बच्चों के माता-पिता थे। गरीबी के कारण दोनों की शादी नहीं हो पाई और एकाएक महालाल की मौत हो गई। मुर्दे के साथ शादी रचाने का निर्णय लेना समाज के लिए एक चुनौती थी। महालाल की आत्मा की सद्गति व बच्चों को अधिकार दिलाने के लिए पूरे समाज को आगे आना पड़ा।

– श्यामलाल टुडू

ग्राम प्रधान, जयपुर

महालाल के जीते-जी मेरी उससे शादी नहीं हो पाई थी। घर-समाज के लोग मुझे और मेरे बच्चों को नहीं रखना चाह रहे थे। पंचों के प्रयास से मैंने महालाल के शव से शादी कर अपने प्रेम को सामाजिक रूप प्रदान किया। इसके बाद मुझे और मेरे बच्चों को सामाजिक मान्यता मिली।

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By न्यूज़ डेस्क

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