नवगछिया। नवगछिया अनुमंडल के अतिसंवेदनशील इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध पर गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से खतरा गंभीर होता जा रहा है। सोमवार सुबह स्पर संख्या-7 पर गंगा का जलस्तर 33.28 मीटर पहुंच गया। यह खतरे के निशान 31.60 मीटर से 1.68 मीटर ऊपर है। वहीं, वर्ष 2021 में दर्ज अब तक के सर्वाधिक बाढ़ स्तर 33.50 मीटर (HFL) से नदी महज 22 सेंटीमीटर नीचे है।

जिस रफ्तार से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे आने वाले घंटों में नया रिकॉर्ड बनने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जलस्तर में लगातार वृद्धि ने इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध और आसपास के दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

12 घंटे में 8 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर

केंद्रीय जल आयोग और जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार रविवार शाम से सोमवार सुबह छह बजे तक महज 12 घंटे में गंगा के जलस्तर में 8 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। गंगा की तेज धाराएं स्पर संख्या-7 और आसपास के स्परों पर लगातार दबाव बना रही हैं।

नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के कारण तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में जलस्तर में थोड़ी और वृद्धि होने पर स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

कागजों में तटबंध सुरक्षित, जमीन पर टो तक पहुंचा पानी

जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट में फिलहाल तटबंध और स्परों की स्थिति को ‘सेफ’ बताया गया है। हालांकि, मौके की स्थिति को लेकर ग्रामीणों की चिंता अलग है। नदी का पानी तटबंध के टो यानी निचले हिस्से तक पहुंच गया है।

टो के आसपास पानी का लगातार दबाव बने रहने से मिट्टी के धंसने और कटाव का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में जलस्तर के साथ-साथ तटबंध के निचले हिस्से और स्परों की लगातार निगरानी बेहद जरूरी हो गई है।

2021 की तबाही फिर डराने लगी

गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने वर्ष 2021 की विनाशकारी बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं। उस वर्ष गंगा का जलस्तर 33.50 मीटर के उच्चतम स्तर तक पहुंचा था। बाढ़ और कटाव के कारण नवगछिया अनुमंडल के कई इलाकों में भारी तबाही हुई थी और बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए थे।

अब वर्तमान जलस्तर उस रिकॉर्ड से महज 22 सेंटीमीटर नीचे है। ऐसे में दियारा क्षेत्र और तटबंध के आसपास बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। यदि जलस्तर में वृद्धि की मौजूदा रफ्तार बनी रही तो अगले 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

24 घंटे निगरानी और फ्लड फाइटिंग की जरूरत

बढ़ते जलस्तर को देखते हुए इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर राउंड-द-क्लॉक निगरानी जरूरी हो गई है। संभावित कटाव वाले स्थानों पर पर्याप्त संख्या में बोल्डर, जियो बैग, सैंड बैग और अन्य बाढ़रोधी सामग्री पहले से उपलब्ध रखने की जरूरत है।

किसी भी तरह के रिसाव, मिट्टी धंसने या अचानक कटाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित टीमों की तैनाती भी महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीणों की मांग है कि विभागीय टीम जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी करे और किसी भी खतरे की स्थिति में तत्काल बचाव एवं राहत कार्य शुरू किया जाए।

फिलहाल गंगा का जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर के बेहद करीब पहुंच चुका है। ऐसे में जलस्तर की हर सेंटीमीटर वृद्धि और तटबंध की हर गतिविधि पर नजर रखना जरूरी हो गया है।

📲 Naugachia News WhatsApp Group Join करें
Join Now →

By न्यूज़ डेस्क

न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.....

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *