खरीक : भागलपुर के कमिश्नर ने बुधवार को खरीक प्रखंड के 3 विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया. कमिश्नर ने खरीद के गामा गांव स्थित महर्षि मेंही उच्च विद्यालय, मध्य विद्यालय अठगामा और मध्य विद्यालय राघोपुर का निरीक्षण किया. निरीक्षण के क्रम में कमिश्नर के साथ नवगछिया के अनुमंडल पदाधिकारी मुकेश कुमार भी मौजूद थे. भागलपुर के कमिश्नर सबसे पहले महर्षि मेंही उच्च विद्यालय अठगामा गये. कमिश्नर के स्कूल घुसते हैं स्कूल में गंदगी का अंबार मिला जिस पर वह भड़क गए. इसके बाद उन्होंने विद्यालय की ओर रुख किया तो पता चला कि अंग्रेजी की परीक्षा हो रही है.


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उन्होंने एक छात्र को खड़ा किया और कहा कि तुम्हें जो प्रश्न पत्र मिला है उसे पढ़कर सुना दो. छात्र प्रश्न पत्र भी पढ़कर नहीं सुना पाया. मौके पर ही कमिश्नर ने प्रधानाध्यापक को कहा कि जब आपका बच्चा प्रश्न भी सही से नहीं पढ़ पा रहा है तो इसका उत्तर वह क्या लिखेगा ! विद्यालय भवन का रंग रोगन भी नहीं किया गया था. कमिश्नर ने वहां के प्रधानाध्यापक को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि 15 दिनों के अंदर आप विद्यालय की स्थिति को सुधारने और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की व्यवस्था को विद्यालय में आ स्थापित करें. इसके लिए वह सबसे पहले शिक्षा समिति की बैठक कर लें और उसमें साफ सफाई के साथ-साथ रंग रोगन करने का भी निर्णय लें. अगर 15 दिनों के अंदर व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो निश्चित रूप से वह कार्रवाई करेंगे.

अपने आवश्यक निरीक्षण के दूसरे पड़ाव पर भागलपुर के कमिश्नर मध्य विद्यालय अठगामा पहुंचे. यहां की भी स्थिति संतोषजनक नहीं थी साफ सफाई की व्यवस्था तो बदतर थी दूसरी तरफ जहां भी छात्रों से जब भागलपुर के कमिश्नर ने कुछ सवाल किया तो छात्रों ने जवाब नहीं दिया. इसके बाद भागलपुर के कमिश्नर ने प्रधानाध्यापक कोई यहां भी निर्देश देते हुए कहा कि साफ सफाई की व्यवस्था के साथ-साथ उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने की भी जिम्मेदारी मिली है. यहां भी कमिश्नर ने 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि 15 दिनों के अंदर व्यवस्था में सुधार कर ले नहीं तो वह कार्यवाही तो करेंगे ही. कमिश्नर ने जब मध्य विद्यालय राघोपुर की ओर रुख किया तो वहां भी कमोबेश ठीक उसी तरह की स्थिति मिली जिस तरह की स्थिति मध्य विद्यालय अठगामा और उच्च विद्यालय अठगामा गांव की थी.

कमिश्नर के आने की कानों-कान किसी को नहीं थी सूचना

नवगछिया में कमिश्नर के आने की सूचना किसी को नहीं थी. जब कमिश्नर विद्यालय पहुंच गए तो पुलिस एस्कॉर्ट की गाड़ी देखकर लोगों ने अनुमान लगाया कि कोई परी पदाधिकारी निरीक्षण में आया है. हालांकि स्थानीय ग्रामीणों के मन में भी शिक्षा व्यवस्था के प्रति कई शिकायत है. लेकिन कमिश्नर का औचक निरीक्षण रहने के कारण ग्रामीण अपनी शिकायत को कमिश्नर तक नहीं पहुंचा पाए. कई ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यहां के विद्यालयों की स्थिति काफी बदतर है. वे लोग साफ-सफाई मध्यान भोजन की बात नहीं कर रहे हैं. वह लोग शिक्षा व्यवस्था की बात कर रहे हैं.

इन स्कूलों में पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है. बच्चे दिनभर स्कूल से जब आते हैं और उनसे अभिभावक पूछते हैं कि तुमने आज स्कूल में क्या सीखा तो बच्चे के पास कहने के लिए कुछ नहीं होता है. ग्रामीणों ने कहा कि उन लोगों को इस बात की खुशी है कि भागलपुर के वरीय पदाधिकारी ने स्कूलों की सुध ली है. अगर इस तरह के निरीक्षण बराबर होते रहे तो निश्चित रुप से शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा.

By Rishav Mishra Krishna

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