शिव भक्तों के लिए लगने वाले श्रावणी मेले में जमीन मालिकों की भी खूब कमाई होती है। इस मार्ग पर हर वर्ष छह हजार से अधिक अस्थायी दुकानें खोली जाती है। जिस भूमि पर दुकानें खोली जाती है उसकी कीमतें हर वर्ष 20 फीसद बढ़ा दी जाती है। जमीन के कारोबार से हर वर्ष करोड़ों का फायदा होता है।
सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर कांवरिया पैदल देवघर जाते है। सुल्तानगंज से देवघर की दूरी 105 किमी है। इस मार्ग का अधिकांश हिस्सा 65 किमी बांका जिले में ही पड़ता है। जहां कांवरिया पथ के दोनों ओर हर साल छोटे-बड़े छह हजार से अधिक अस्थाई दुकानें लगाई जाती है। अस्थायी दुकानों के लिए हर साल एक माह के लिए भूस्वामी अपनी जमीन का सौदा दुकानदारों से तय करते हैं। इसमें करोड़ों का कारोबार होता है।

प्रसिद्ध स्थानों की कीमत आसमान पर
कांवरिया पथ में पडऩे वाले प्रसिद्ध स्थानों के जमीन की कीमत आसमान पर रहती है। जिला के प्रवेश द्वार धौरी, जिलेबिया मोड़, इनारावण, सुईया, कांवरिया धर्मशाला, भूतनाथ धाम, गोडिय़ारी, आदि जगहों पर तीन से पांच हजार रुपए वर्ग फीट के दर से एक माह के लिए जमीन की कीमत तय होती है। यहां तक कि जंगली व पहाड़ी इलाकों की जमीन की कीमत काफी बढ़ गई है।
हर वर्ष 20 फीसद तक बढ़ती है कीमत
कांवरिया पथ जमीन की कीमत हर साल 20 फीसद तक बढ़ा दी जाती है। पिछले साल जिस जमीन की कीमत चार हजार रुपए वर्ग फीट थी, उसकी कीमत इस बार सीधे पांच हजार रुपये तक कर दी गई है।
केस स्टडी वन
जमीन मालिक अनुप कुमार सिंह ने इस बार कांवरिया धर्मशाला के पास अपनी जमीन को चार से पांच सौ रुपये प्रति वर्ग फीट के दर से दुकानदारों को दिया है। जबकि पिछले साल उसने इसी जमीन की कीमत दो से तीन सौ रुपये वर्ग फीट रखी थी।
केस स्टडी टू
भू स्वामी अरुण शर्मा ने कांवरिया पथ पर दुल्लीसार में अपनी जमीन को एक से दो हजार रुपये वर्ग फीट के हिसाब से एक महिने के लिए दुकान व होटल मालिक को दिया है। यहां पर उसकी काफी जमीन है जो उसके जीने का जरिया है।
केस स्टडी थ्री
इनारावण निवासी जय प्रकाश शर्मा ने भी अपनी जमीन को दो हजार प्रति वर्ग फीट के दर से एक महीने लिए दुकानदारों को लीज पर दिया है। लेकिन जिलेबिया मोड़ एवं सुईया सहित कई प्रसिद्ध स्थानों पर चार से पांच हजार रुपये वर्ग फीट जमीन मिल रही है।


