नवगछिया । विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद गंगा पार के लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। लोगों को वर्ष 2021 से पहले की स्थिति याद आने लगी है, जब गंगा पार करने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा हुआ करती थी। सबसे अधिक परेशानी गंगा पार से आकर ड्यूटी करने वाले सरकारी कर्मियों और शिक्षकों को हो रही है।


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गंगा पार से ड्यूटी करने पहुंचे शिक्षक दयानंद ने नाव से उतरते ही कहा कि सुबह साढ़े छह बजे घाट पहुंचे थे, लेकिन साढ़े आठ बजे गंगा पार कर सके। उन्होंने बताया कि घाट पर इतनी नावें लगी रहती हैं कि नाव सटाने तक की जगह नहीं मिलती।

शिक्षकों ने बताया कि घाटों पर अफरातफरी का माहौल बना रहता है। बाइक चढ़ाने में काफी परेशानी होती है और नाविक अधिक से अधिक यात्रियों को बैठाने की कोशिश में रहते हैं, जिससे व्यवस्था बिगड़ जाती है। हालांकि उन्होंने प्रशासन की व्यवस्था को बेहतर बताते हुए कहा कि थोड़ी और निगरानी और सुधार की जरूरत है।

प्रशासन से व्यवस्था सुधारने की मांग

कर्मियों और शिक्षकों ने प्रशासन से नावों को कतारबद्ध तरीके से लगवाने और एक-एक कर परिचालन कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि टिकट लेने और नाव पर चढ़ने के लिए लाइन व्यवस्था लागू होनी चाहिए, ताकि अव्यवस्था कम हो सके।

शाम पांच बजे बाद नाव बंद होने से बढ़ी दिक्कत

भागलपुर से नवगछिया कार्यालय, कॉलेज और व्यवहार न्यायालय में ड्यूटी करने वाले कर्मियों ने भी अपनी परेशानी साझा की। सर्राफ कॉलेज के शिक्षक अजय कुशवाहा ने कहा कि कार्यालय शाम पांच बजे तक चलता है, लेकिन प्रशासन ने पांच बजे के बाद नाव परिचालन बंद करने का आदेश दिया है, जिससे लोगों को भारी परेशानी हो रही है।

कर्मियों ने मांग की कि नाव और क्रूज परिचालन का समय बढ़ाया जाए ताकि लोगों को आने-जाने में दिक्कत न हो। यात्रियों का कहना है कि शाम पांच बजे तक उजाला रहता है, इसलिए परिचालन जारी रहना चाहिए।

By न्यूज़ डेस्क

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