नवगछिया : दीपों का पर्व दीपावली सोमवार को है। पर्व को लेकर बाजार में उत्साह का माहौल है। रविवार की देर रात तक लोगों ने पूजन सामग्री व मिठाई की खरीदारी की। इस दौरान दुकानदारों का अच्छा कारोबार हुआ। लोग मोमबत्ती, घरौंदा, गणेश लक्ष्मी की मूर्ति, आसन कपड़ा, कोड़ी, कमल गट्टा, चीनी मिट्टी के खिलौने, मिट्टी के खिलौने, फूल-माला आदि की खरीदारी की। इससे पूर्व छोटी दिवाली को लेकर लोगों ने अपने-अपने घरों में संध्या के समय यम के दीपक जलाये और यमराज से परिवार की सुख-शांति की कामना की। अधिकांश लोगों का घर रोशनी से जगमगा रहा है।

इस बार दीपावली में वैधृति योग और हस्त नक्षत्र का संयोग बन रहा है। साथ ही चित्रा नक्षत्र व विष्कुंभ योग भी बन रहा है। जगन्नाथ मंदिर के पंडित दयानंद पाण्डेय  ने बताया कि दीपावली कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है। रात्रि में सिंह लग्न में मां काली की प्रतिमा बेदी पर स्थापित होगी। इसमें भी प्रदोष रात्रि व्यापिनी अमावस्या का संयोग बन रहा है।

दिवाली पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा अमावस्या तिथि में रात्रि के समय होती है। शास्त्रों के आधार पर दिवाली को लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में करने का विधान है। इसमें भी स्थिर लग्न की प्रधानता होती है। इस काल में स्वाति नक्षत्र का योग भी बनता है, इसलिए दीपावली की पूजा वृष, सिंह और कुंभ लग्न में करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। मिथिला पंचांग के अनुसार वृष लग्न शाम 6:55 से 8:51, सिंह लग्न रात्रि एक बजे से 3:14 व कुंभ लग्न दोपहर 1:55 से 3:26 तक है।
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छोटी दीपावली पर जलाये गये यम के दीपक

छोटी दीपावली पर लोगों ने अपने-अपने घरों में यम के दीपक जलाये। पंडित सुभाष पाण्डेय ने बताया कि नरक चतुर्दशी पर यम के नाम का दीपक प्रज्ज्वलित करने के संबंध में एक कथा प्रचलित है जिसके अनुसार एक बार यमदेव ने अपने दूतों को अकाल मृत्यु से बचने का उपाय बताते हुए कहा था कि जो व्यक्ति कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन दीप जलायेगा उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। इसलिए नरक चतुर्दशी पर शाम के समय यम के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। इसीलिए लोगों ने रविवार को संध्या काल में गोबर के दीपक में सरसों तेल का दक्षिण दिशा में जलाये। धर्म शास्त्रों के अनुसार दक्षिण दिशा को यम देव की दिशा माना गया है, इसलिए चतुर्दशी तिथि पर यम के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में जलाया जाता है।

सजावट के समानों की भी खूब हुई बिक्री

दीपावली को लेकर सजावट के सामानों की बिक्री भी खूब रही। लोगों ने मनी प्लांट ट्री की खरीदारी अधिक की। इसकी कीमत एक हजार से 43 सौ रुपये थी। इसके अलावा सूर्यमुखी, अनार, सेब, नारंगी, नाशपाती के सजावट के पौधे 500 से एक हजार रुपये में बिक रहे थे।

केला व कमल फूल का है खास महत्व

लक्ष्मी पूजन के समय केला का थम व कमल फूल का विशेष महत्व है। रविवार को इसकी बिक्री खूब रही। नवगछिया से कई लोग इसे बेचने भागलपुर पहुंचे थे। पंडित श्रीराम पाठक ने बताया कि पूजा के समय केला का थम से धन, सुख-सुविधा, वंश आदि की वृद्धि होती है। इसलिए हर पर्व में केला का थम या फल का महत्व है। उन्होंने कहा कि कमल से भगवान विष्णु का अवतरण हुआ है इसीलिए मां लक्ष्मी का यह प्रिय फूल है।

पंडितों की बढ़ी मांग

दीपावली के दिन गणेश-लक्ष्मी के पूजन के लिए पंडितों की काफी मांग है। पंडित मुहूर्त देखकर कीमत तय कर रहे हैं। एक-एक पंडित गुरुवार को कई जगहों पर पूजा-अर्चना करायेंगे। पंडित श्रीराम पाठक ने बताया कि उनका भी चार जगहों पर पहले से बुकिंग है। लग्न के अनुसार पूजा कराने की कीमत होती है।

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By न्यूज़ डेस्क

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