नवगछिया – अंगिका के महाकवि भगवान प्रलय के आकस्मिक निधन के बाद नवगछिया अनुमंडल का बुद्धिजीवी समाज स्तब्ध है. मालूम हो कि नवगछिया के विभिन्न इलाकों से भगवान प्रलय का गहरा नाता रहा है. उन्होंने यहां पर पिछले 40 वर्षों में कई कवि सम्मेलन में शिरकत किया था. उनके गाने बच्चों बच्चों को जुबानी थी. अंगिका के प्रथम ध्वनि वैज्ञानिक डॉ रमेश मोहन आत्मविश्वास ने कहा कि भगवान प्रलय का अकस्मात चले जाना पीड़ादायक है.
Total Downloads: 167
इसके लिये इलाकाई साहित्य जगत बिल्कुल तैयार नहीं था. जब तक यह सृष्टि रहेगी तबतक भगवान प्रलय के गीत यहां के गंगा किसी कछारों में गुंजते रहेंगे. इधर 85 वर्षीय अंगिका के मूर्धन्य कवि भगवान प्रलय के निधन पर अंग जनपद के सभी साहित्यकार, कवि, लेखक और भगवान प्रलय के प्रेमी आहत है. भगवान प्रलय का बिहपुर से गहरा रिश्ता रहा है. साहित्य प्रेमी गौतम कुमार प्रीतम कहते हैं “भगवान प्रलय अंग और अंगिका साहित्य जगत के कोहिनूर हैं.

वो सदा हमसब के बीच चमकते रहेंगे और अंग साहित्य ऊंचाई पर बढ़ता जाएग. आज अंतिम विदाई पर भगवान प्रलय के वो गीत बरबस याद आ जाती है- हारी गेलौं जोगिया से नजरी मिलाय….. पोखरी किनारी होय के चलिहैं रे कहरा देखि लेबै बाबा के बहियार रे……श्रद्धा-सुमन अर्पित करने में गौतम कुमार प्रीतम, रवीन्द्र कुमार सिंह, श्याम कुमार सक्सेना, गौरव कुमार, धनंजय सुमन, अरूण कुमार अंजाना, दिवाकर भारती सहित अन्य लोगों ने भी शोक संवेदना व्यक्त किया है.

