नवगछिया : मिथिला संस्कृति पर आधारित 14 दिनों तक चलने वाले मधुश्रावणी व्रत का बुधवार को समापन हो गया। मधुश्रावणी व्रत के अंतिम दिन नवविवाहिता महिलाओं ने विधि-विधान के साथ भगवान शिव-माता पार्वती, नाग-नागिन एवं हाथी की पूजा की। इस दौरान मैथिल समाज की महिलाओं व युवतियों ने गोसाईं गीत, कोहबर गीत, शिव-पार्वती के भजन, झूमर, कजरी गीत, श्रावणी गीत, विषहरी गीत गाए।
इसमें मैथिल समाज की नवविवाहिताएं 14 दिनों तक व्रत किया। पंडित सौरभ कुमार मिश्रा ने बताया कि मधुश्रावणी व्रत में मैथिल समाज की नवविवाहिताएं भगवान शिव और माता पार्वती नाग-नागिन, हाथी की मूर्ति स्थापित कर श्रावण शुक्ल की पंचमी तिथि से पूजा शुरू की थी।
जिसका समापन सात अगस्त को हुआ। प्रतिदिन श्रद्धा-भक्ति के साथ पूजन किया गया। शिखा झा, पूजा झा, गीता, रूचि, मुन्नी, रिया, रूबी आदि ने कोहबर गीत सावन पावन पूजबै बलम संग…, गौरी फूल लोहड़ै लै गेली फुलवारी…आदि गीत गा रही थीं। शिखा ने बताया कि अंतिम दिन 14 बार कथा कही और सुनी गई। इस दौरान महिलाओं ने सुहाग दिया।


