नई दिल्ली : 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले बिहार में एनडीए की राह आसान होती नजर नहीं आ रही है. रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाह पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ बगावती तेवर अपनाए हुए हैं. अब लोक जनशक्ति पार्टी की ओर से भी तेवर तीखे कर लिए गए हैं. लोजपा की ओर से इशारों इशारों में कहा गया है कि उन्होंने भाजपा को समर्थन मुद्दों के आधार पर दिया है. दरअसल लोजपा की ओर से ये धमकी रामविलास पासवान ने नहीं बल्कि उनके पुत्र चिराग पासवान ने दी है. दरअसल लोकजन शक्ति पार्टी जस्टिस एके गोयल को एनजीटी का प्रमुख नियुक्त किए जाने पर आपत्ति जता रही है.


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दरअसल जस्टिस एके गोयल सु्प्रीम कोर्ट की बैंच ने वह फैसला सुनाया था, जिसमें कहा गया था कि एससी एसटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी. उनकी नियुक्ति का विरोध करते हुए अब लोजपा ने कहा है कि एनजीटी के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल को बर्खास्त किया जाना चाहिए, क्योंकि वह सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ का हिस्सा थे, जिसने दलितों और आदिवासियों पर अत्याचारों को रोकने के लिए बने कानून के प्रावधानों को कथित तौर पर कमजोर किया था. कैबिनेट मंत्री रामविलास पासवान के बेटे एवं लोजपा नेता चिराग पासवान ने कहा कि गोयल को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के वास्तविक प्रावधानों को बहाल किया जाना चाहिए.

आंदोलन में शामिल होने की धमकी

उन्होंने चेताया कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो नौ अगस्त को दलित संगठनों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन दो अप्रैल को हुए आंदोलन से भी ज्यादा तीव्र हो सकता है. इसमें खुद लोजपा भी हिस्सा ले सकती है. दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान हुए प्रदर्शन देश के कई स्थानों पर हिंसक हो गए थे. इनमें कई लोगों की मौत हो गई थी और संपत्ति को भी काफी नुकसान हुआ था. चिराग पासवान ने कहा कि शीर्ष कोर्ट से सेवानिवृत्त होने के बाद गोयल को एनजीटी का अध्यक्ष नियुक्त करने से गलत संदेश गया है और इससे दलित समुदाय क्षुब्ध हुआ है.

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अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के दुरुपयोग पर अपनी चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में एक आदेश दिया था और बचाव के कई उपाय दिए थे. दलित संगठनों और कई राजनीतिक दलों का कहना है कि इस फैसले से कानून कमजोर हुआ है. लोजपा नेता ने कहा कि दलित संगठनों को शांत करने के लिए सरकार को नौ अगस्त से पहले संसद में नया विधेयक लाकर या अध्यादेश के जरिए कानून के वास्तविक प्रावधानों को बहाल करने के लिए कदम उठाने चाहिए.

चिराग पासवान ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा, एससी/एसटी एक्ट मामले में हम चाहते हैं कि ऑर्डिनेंस लाया जाए. लेकिन अब ये हो नहीं सकता. इसलिए हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार 7 अगस्त को इसे बिल के तौर पर पेश करे और पुराने कानून को लागू करे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो 9 अगस्त को होने वाला दलितों का आंदोलन 2 अप्रैल से ज्यादा हिंसक हो सकता है.

रामविलास पासवान ने नहीं खोले हैं अपने पत्ते

लोकसभा चुनाव में साल भर से कम समय बचा है. लेकिन बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में नेतृत्व के ‘चेहरे’ और ‘सीटों’ को लेकर अभी से टकराव शुरू हो गया है. राजग घटक दलों में शामिल सभी पार्टियां अधिक से अधिक सीटों पर अपनी दावेदारी कर रही हैं. वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (युनाइटेड) राज्य में खुद को ‘बड़े भाई’ के रूप में पेश कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर दबाव बना रही है. उपेंद्र कुशवाह की रालोसपा नीतीश कुमार का नेतृत्व स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं. वहीं रामविलास पासवान ने भी अभी कोई घोषणा नहीं की है. जाहिर है, वह अंतिम समय तक देखना चाहते हैं, उन्हें जहां भी फायदा दिखाई देगा, वह उसी ओर चले जाएंगे

By न्यूज़ डेस्क

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