मोबाइल फोन पर गेम खेलते-खेलते कक्षा 9वीं की 14 वर्षीय छात्रा ने कमरा बंद करके फांसी लगा ली। उसे मां ने मोबाइल फोन पर गेम खेलते रहने के लिए डांटा था। छात्रा ने मां को डराने के लिए फांसी का फंदा बनाया था।

पिता की अपील… बच्चों को सही-गलत में फर्क बताएं, उनकी बातों को नजरअंदाज न करें: वह मोबाइल फोन पर गेम खेलती रहती थी। शाहीन के डांटने पर कहती थी मां, मैं फांसी लगा लूंगी। हमें लगा बच्ची है। मजाक में बोलती है। उसने जो मांगा, हमने दिया। अभी 22 जुलाई को ही तो उसका 14वां जन्मदिन मनाया था। वह फांसी और मौत के बारे में क्या जानती होगी। वह तो मां को डराने के लिए कह रही होगी और गलती से फंदा लग गया होगा।

काश! मैंने उसे समझाया होता। बेटी को एक सीमा तक ही मोबाइल फोन देना था। वह क्या गेम खेल रही थी। हमें पता होना था। वह मजाक में फांसी लगाने की बात कहती थी। मुझे उसके दिमाग से यह ख्याल हटाना चाहिए था। काश, मैंने ऐसा किया होता तो आज मेरी फूल से बच्ची जिंदा होती। मैंने तो अपनी बच्ची खो दी, लेकिन सभी माता-पिता से गुजारिश है कि वे बच्चों की छोटी सी छोटी बातों को नजरअंदाज न करें। उन्हें सही-गलत में फर्क समझाएं क्योंकि आज हमें जो दर्द मिला है, वो किसी और को न मिले।-

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By न्यूज़ डेस्क

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