भागलपुर में विक्रमशिला सेतु पर राहत की राह अब धीरे-धीरे आकार ले रही है, लेकिन यह सफर तेज रफ्तार नहीं बल्कि सतर्कता और अनुशासन के साथ तय होगा। गंगा नदी पर बनाए जा रहे अस्थायी बेली ब्रिज से वाहनों की आवाजाही के लिए प्रशासन ने सख्त नियम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
तकनीकी और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसमें एक भारी वाहन के पूरी तरह पुल पार करने के बाद ही दूसरे वाहन को प्रवेश दिया जाएगा। वहीं छोटे वाहनों के लिए वन-वे सिस्टम लागू रहेगा, ताकि पुल पर दबाव नियंत्रित रखा जा सके और किसी भी दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके।
भारी वाहनों के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था
सीमा सड़क संगठन (BRO) के कार्यपालक अभियंता विपिन चंद ने बताया कि बेली ब्रिज की संरचना सामान्य पुलों से अलग होती है और इसकी भार वहन क्षमता सीमित होती है। इसी कारण एक समय में केवल एक ही भारी वाहन को पुल पर जाने की अनुमति दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस तकनीकी व्यवस्था से पुल पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा, संरचना सुरक्षित रहेगी और यातायात संचालन भी बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।
दोनों छोर पर बनेंगे कंट्रोल सेंटर
प्रशासन केवल पुल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यातायात नियंत्रण की व्यापक योजना भी तैयार की जा रही है। इसके तहत बेली ब्रिज के दोनों ओर विशेष शेड बनाए जाएंगे, जहां वाहनों की निगरानी और संचालन किया जाएगा।
इसके अलावा पुल से कुछ दूरी पर बड़े प्रतीक्षालयनुमा शेड भी बनाए जाएंगे, जहां वाहनों को नियंत्रित तरीके से रोका जाएगा। इससे एक साथ अधिक भीड़ पुल पर नहीं पहुंचेगी और यातायात सुचारु बना रहेगा।
बैरियर, पुलिस और मजिस्ट्रेट रहेंगे तैनात
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुल के दोनों ओर मजबूत बैरियर लगाए जाएंगे। साथ ही मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती भी की जाएगी। प्रशासन वाहनों को उनकी श्रेणी के अनुसार अलग-अलग कतारों में खड़ा करेगा।
भारी वाहन, चारपहिया और दोपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग लेन निर्धारित की जा रही हैं। तय समय अंतराल के अनुसार पहले एक दिशा से वाहनों को निकाला जाएगा, फिर दूसरी दिशा के वाहनों को आगे बढ़ाया जाएगा।
“सुरक्षा पहले, रफ्तार बाद में”
अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था भले ही धीमी लगे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यही सबसे सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प है। स्थायी समाधान होने तक यात्रियों को नियंत्रित यातायात व्यवस्था के साथ ही सफर करना होगा।
प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि विक्रमशिला सेतु पर फिलहाल प्राथमिकता केवल सुरक्षा और संरचना की मजबूती को दी जाएगी, न कि वाहनों की तेज आवाजाही को।

