मधेपुरा। जो आवाज कभी गरीबों की मदद के लिए लोकसभा में गूंजा करती थी। आज उनके परिवार की आवाज को सुनने वाला कोई नहीं है। सरकारें आईं और चली गईं। लेकिन किसी सरकार ने इनके परिवार की कोई सुध नहीं ली। जी हां! हम बात कर रहे हैं मधेपुरा के दलित सांसद रहे किराय मुसहर की। सांसद का परिवार आज दाने-दाने को मोहताज है।
दिवंगत किराय मुसहर के परिवार को आज न रहने को घर है और न खाने को अन्न। दाने दाने को मोहताज पुत्र व पुत्रवधु मजदूरी कर किसी तरह अपना पेट चला रहे हैं। आज तक एक अदद इंदिरा आवास नसीब नहीं हो सका। जिसके कारण प्लास्टिक और फूस का झुग्गी बनाकर रह रहे हैं। हैरानी की बात ये कि भारत सरकार और बिहार सरकार लाख स्वच्छता और खूले में शौचमुक्त का ढिंढोरा पीट ले लेकिन हकीकत यही है कि एक पूर्व सांसद के घर में शौचालय नहीं है। सांसद का परिवार खुले में शौच करने को मजबूर है। घर तक जाने के लिए एक सड़क तक नहीं है।
वर्ष 1952 में चुने गए सांसद
बता दें कि वर्ष 1952 में दिवंगत किराय मुसहर भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गये। उस समय कोसी प्रमंडल और पूर्णियां प्रमंडल भागलपुर लोक सभा क्षेत्र में ही आते थे। आजकल अगर एक बार कोई आदमी सांसद क्या मुखिया बन जाता है तो अपने आने बाले दस पीढ़ी के लिए अकूत संपत्ति अर्जित कर चले जाते हैं। लेकिन ईमानदारी के प्रतीक सांसद किराय मुसहर जिन्होंने अपने परिवार के लिए कुछ नहीं किये और जब तक सांसद रहे तब तक दूसरों की भलाई हेतु सरक से सदन तक आवाज उठाते रहे थे।


सड़क बनाने के लिए बेच दी थी जमीन
इतना ही नहीं, एकबार मधेपुरा प्रखंड के हनुमाननगर गांव में सड़क नहीं थी सांसद स्व. किराय मुसहर को ग्रामीणों ने कहा कि जाने आने में बहुत परेशानी हो रही है। सांसद ने अपनी 15 कठ्ठा जमीन बेचकर कर सड़क बनवा दिया। अपने वेतन का कुछ हिस्सा क्षेत्र के बीमार व गरीब जनता के बीच बांट दिया करते थे।
लाल बहादुर शास्त्री भी देते थे स्नेह
परिवार के सदस्य बताते हैं कि किराय मुसहर को प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री बहुत मानते थे। दिवंगत सांसद किराय मुसहर के पुत्र छठु ऋषिदेव भी कहते हैं कि मेरे पिता सब दिन समाज के लिए ही किये अपने परिवार के लिए कुछ नहीं किए। इसी का परिणाम है कि आज सांसद का पुत्र व पुत्रवधु मजदूरी कर जीवन चला रहे हैं।


