भागलपुर : राज्य में महंगे वाहनों के दाम व निबंधन शुल्क से बचने के चक्कर में पड़ोसी राज्य से वाहन खरीदने व वहीं से निबंधन (गाड़ी नंबर) कराने वालों के लिए बुरी खबर है. दूसरे राज्य के नंबर वाले वाहनों के नियमित प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई होगी. डीटीओ, मोटरयान निरीक्षक व ट्रैफिक पुलिस उक्त वाहनों का चालान करेंगे.


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उनके खिलाफ कम से कम 5000 रुपये का जुर्माना लगेगा. इस प्रकार का निर्देश परिवहन विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने जारी किया है. विगत दिनों दूसरे राज्य के नंबर वाले वाहन का यहां पर नियमित प्रयोग अधिक बढ़ गया है. सचिव ने नियमित रूप से अन्य राज्य के नंबर वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चलाते हुए स्थानीय स्तर पर निबंधन करवाने पर जोर दिया है. इस बारे में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार भी भागलपुर व बांका के जिला परिवहन पदाधिकारी को पत्र भेज रहा है.

विभागीय सचिव ने दिया निर्देश- 5000रु तक भरना पड़ सकता है जुर्माना
सचिव के पत्र में अधिनियम का दिया हवाला

मोटरयान अधिनियम की धारा-49 के तहत अपने निवास स्थान अथवा व्यवसाय स्थल में परिवर्तन होने पर वाहन को वहां पर ले जाते हैं तो अधिकतम 30 दिनों के भीतर वाहन का नये स्थल के निबंधन प्राधिकार(डीटीओ) को जानकारी देना अनिवार्य है. इसके बाद ही नये स्थल पर वाहन चलाने की अनुमति होगी. इस धारा के खिलाफ अन्य राज्य के निबंधित वाहन भी बड़े पैमाने पर यहां की सड़क पर चल रहे हैं. उनका परिचालन अवैध है.

प्रत्येक सप्ताह दूसरे राज्य के नंबर वाले वाहन की करें जांच

परिवहन सचिव ने पत्र में उल्लेख किया कि दूसरे राज्य के नंबर वाले वाहनों को प्रत्येक सप्ताह जांच करें. इस तरह अभियान में पकड़े गये वाहनों पर जुर्माना लगवायें. जुर्माने के तौर पर 30 दिनों तक अस्थायी परिचालन के लिए निर्धारित टैक्स और उक्त टैक्स की दोगुनी राशि लेने का प्रावधान है. यह जुर्माना राशि 5000 रुपये से कम नहीं होगी.

वाहन विक्रेता डीलर से भी बिक्री वाले वाहनों का प्रकार व निबंधन का मांगा जायेगा आंकड़ा

परिवहन सचिव ने वाहन विक्रेता डीलर से भी बिक्री वाले वाहन व उनके निबंधन का आंकड़ा मंगवा रही है. इससे यह अंदाजा लगाया जायेगा कि वास्तव में कितने वाहनों का स्थानीय निबंधन हुआ और दूसरे राज्य से कितने निबंधित वाहन चल रहे हैं.

सीमा क्षेत्र वाले वाहन विक्रेता डीलर के भी मिलीभगत की होगी जांच

परिवहन सचिव को यह भी शिकायत आयी है कि सीमा क्षेत्र वाले वाहन डीलर द्वारा वाहन को बेचा तो जाता है, मगर पड़ोसी राज्य से निबंधन यानि गाड़ी का नंबर दिलवाया जाता है. इस कारण राज्य को निबंधन शुल्क से आनेवाली आय का नुकसान हो रहा है. इस मामले को लेकर भी विशेष तौर पर सीमा क्षेत्र के डीलर के आंकड़े का विश्लेषण होगा.

By न्यूज़ डेस्क

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