बिहार की जूली और प्रोफेसर मटुकनाथ की प्रेम कहानी एक वक्त सुर्खियां बनी थी. आज भी जब भी प्यार का जिक्र होता है, उम्र और रिश्तों के बंधन से मुक्त होकर दोनों की प्यार की चर्चा जरूर होती है. यूं तो जूली मटुकनाथ की उम्र से आधी थी, रिश्ते में उनकी शिष्या थी लेकिन दोनों के बीच प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि परिवार समाज सब कुछ होते हुए दोनों एक दूसरे के हो गए थे. सब की नाराजगी झेली लेकिन एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा लेकिन आज वही प्यार दोनों के बीच नहीं रहा.

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वैलेंटाइन वीक के मौके पर बिहार में हमेशा इस प्रेमी जोड़े की चर्चा होती है. जूली मटुकनाथ से अलग हो गई हैं और यही वजह है कि मटुकनाथ आज अकेले अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं. मटुकनाथ ने कहा कि प्यार कोई बंधन नहीं कि किसी को बांधकर रखा जाए. जूली और हम एक दूसरे से उस वक्त बेइंतहा प्यार करते थे एक दूसरे के बिना रहने का सोच भी नहीं सकते थे लेकिन अब वह प्यार नहीं रहा यही वजह है कि जूली वेस्टइंडीज में सेटल हो गई है. 2017 में ही वह मुझे छोड़ कर चली गई कभी-कभी फोन पर बातचीत हो जाती है.

मटुकनाथ बताते हैं कि मैंने कई बार कहा- साथ रहें लेकिन उन्हें वेस्टइंडीज में रहना ही पसंद है क्योंकि अब उन्हें मुझसे वह प्यार नहीं रहा, क्योंकि अगर प्यार होता तो दुनिया का कोई कोना हो, हम साथ ही रहते. अलग-अलग बिल्कुल नहीं रहते. मटुकनाथ कहते हैं कि एक वक्त था जब हम और जूली एक साथ समय बिताया करते थे. इस सिलसिले में हम घूमने गए. मेघालय जहां शिलांग जूली को बहुत पसंद आया. उसने कहा कि हम अपनी पूरी जिंदगी यही बिताएंगे एक साथ लेकिन अब एहसास बदल गए इसीलिए जूली मेरे साथ रहने की बजाय अकेले वेस्टइंडीज में रह रही है.

जूली से प्यार होने के बाद मटुकनाथ के परिवार ने उन से नाता तोड़ दिया. आज मटुकनाथ अकेले भागलपुर में अपनी जिंदगी काट रहे हैं. सवाल का जवाब देते हुए मटुकनाथ कहते हैं कि उनकी पत्नी से उनकी मुलाकात कभी-कभी कोर्ट में होती है उनकी पत्नी उन्हें देखना तक नहीं चाहती. उनके बेटे ने पिछले कई सालों से अपने पिता से ना बातचीत की ना उनकी शक्ल देखी बेटे की शादी हो गई दो बेटियां हैं लेकिन ना शादी की जानकारी ना बच्चों की जानकारी मटुकनाथ को दी गई दूसरों के माध्यम से उन्हें पता चलता है कि उनके बेटे की शादी हो गई है उनकी पोती हुई है.

मटुकनाथ से जब पूछा गया कि बुरा लगता है कि जिन किसके लिए अपने पूरे परिवार को छोड़ा आज वही छोड़कर चली गई है मटुकनाथ मुस्कुराते हैं और कहते हैं कि बुरा क्यों लगेगा साथ होते तो बहुत अच्छा होता लेकिन जब साथ है ही नहीं तो उसके बारे में क्यों सोचे. जूली की बीच में तबीयत खराब हुई तो मैं उससे मिलने गया था. 2020 में 4 महीने उसके साथ रहा क्योंकि लॉक डाउन लग गया था. तबीयत ठीक होने के बाद जूली ने मुझे कुछ कविताएं लिखकर भेजिए कविताएं देखकर मुझे बहुत खुशी हुई.

मटुकनाथ कहते हैं कि उसी प्यार के एहसास के साथ उसके दूरी के गम को जी रहा हूं. जूली से कोई अपेक्षा नहीं क्योंकि अब वह एहसास हम दोनों के बीच रहा ही नहीं. जूली अब कभी भी मेरे साथ रहेगी ही नहीं फिर साथ के बारे में क्यों सोचूं.

By न्यूज़ डेस्क

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