पटना : डिजिटलाइजेशन के इस दौर में स्मार्ट डिवाइस इंसान की सबसे बड़ी जरूरतों में शुमार हो गए हैं। किसी भी डिवाइस को जिंदा रखने में बैटरी का अहम किरदार होता है। अब ज्यादा क्षमता वाली बैटरी भी हमें संतुष्ट नहीं कर पा रही हैं। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने एक ऐसे मोबाइल फोन का निर्माण किया है, जो बिना बैटरी के चलता है। वैज्ञानिकों के इस प्रयोग से भविष्य में बिना बैटरी के संचालित होने वाले डिवाइस बनने की संभावना काफी ज्यादा हो गई है।
कई बार फोन पर जरूरी बात करते हुए बैटरी खत्म होने की वजह से कॉल बीच में ही डिसकनेक्ट हो जाती है। ऐसा न जाने कितनी बार होता है जब फोन की बैटरी लाइफ उपभोक्ताओं को बीच रास्ते में ही धोखा दे देती है। ऐसे में सोचिए अगर हमारे पास बिना बैटरी के चलने वाले स्मार्ट डिवाइस आ जाएं तो कैसा होगा। दरअसल, अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के खोजकर्ताओं ने एक ऐसे फोन का निर्माण किया है जो बिना बैटरी के चलता है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

बैकस्कैटर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक बैटरी-फ्री फोन बनाया है। यह फोन बैकस्कैटर टेक्नोलॉजी पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने अभी इसका प्रोटोटाइप ही तैयार किया है, लेकिन इस प्रयोग से भविष्य में बैटरीलेस डिवाइस बनने की उम्मीद काफी ज्यादा बढ़ गई है। यह एक बेसिक फोन यानी फीचर फोन है जिसमें सर्किट बोर्ड पर फिजिकल कीपैड के अलावा एक छोटी एलईडी डिस्प्ले लगाई गई है। फोन में अत्यधिक ऊर्जा की मांग को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने इस प्रोटोटाइप को तैयार किया है।
15 मीटर की दूरी से होगी बातचीत
बैकस्कैटर तकनीक पर आधारित यह फोन सूचना भेजने या प्राप्त करने के लिए वातावरण में पहले से मौजूद ‘लो पावर रेडियो सिग्नल’ का उपयोग करता है। यह डिवाइस डिजिटल क्षमताओं की बजाय एनालॉग टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है। इसके जरिए इंसान करीब 15 मीटर की दूरी से फोन पर आसानी से बातचीत कर सकता है। खोजकर्ताओं ने बताया कि एनालॉग ह्यूमन स्पीच को डिजिटल सिग्नल में ट्रांसफर कर कम्यूनिकेट करने में बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा खर्च होती है। जबकि एनालॉग टेक्नोलॉजी का उपयोग कर संवाद करने में बेहद कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो यह डिवाइस वातावरण में मौजूद रेडियो तरंगों से प्राप्त कर लेता है। इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल शीत युद्ध के समय में भी हो चुका है। यह डिवाइस केवल एक निश्चित फ्रीक्वेंसी के रेडियो तरंगों द्वारा सक्रिय किया गया था।
स्मार्ट फीचर जोड़ने की उम्मीद
बैकस्कैटर तकनीक पर आधारित इस फोन के माध्यम से अभी केवल कॉल और एसएमएस किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर इसे एक बेसिक फोन माना जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में इस तकनीक को बेसिक की बजाए स्मार्ट डिवाइस के लिए भी विकसित किया जा सकता है। यदि ऐसा संभव हुआ तो यह सूचना और तकनीक के क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। यानी स्मार्ट डिवाइस पर घंटों लगातार काम करने के बाद भी आपको बैटरी खत्म होने की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही फोन चार्जिंग की वजह से बढ़ने वाला इलेक्ट्रिसिटी बिल आपकी जेब पर पड़ने वाले वित्तीय भार को भी कम करेगा।


