नवगछिया: चोटी के पीछे क्या है’…’चोटी के आगे खौफ है’…’चोटीचोर पकड़ा जाएगा’..’चोटीकटवा LIVE’…ऐसे डायलॉग आजकल टीवी चैनल पर खूब चल रहे हैं । खबरिया चैनल्स में चोटी कहानी गढ़ने की नई किरदार बन गई है। चोटी को रेटिंग का हथियार मान लिया गया है। लेकिन चोटी किसने काटी? कहां काटी गई? किसने चोटी काटने वाले को देखा? इन सवालों का जवाब देने के बजाय सिर्फ अफवाहें फैलाई जा रही है। अफवाह भी ऐसे ऐसे वैसे नहीं, रात में गलियों में व्हात्सप्प रिपोर्टर घूमते हैं। खुद चोटी कटवा को ढूंढते हैं। शहर-शहर में चोटी कटवा का कहर ऐसी हेडलाइन लगाई जाती है। लेकिन हकीकत है कि चोटी कटवा कोई नहीं है। चोटी कटवा केवल सोसल मीडिया पर ही दिख रहा है।


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नवगछिया बाजार के चोटी कटवा के नाम पर नोनिया पट्टी और नया टोला कुछ दिन पहले किसी के साथ मारपीट करने की खबर मिली वही के मुख्य द्वार पर लोग दहशत से घर में नीम और हाथ का चाप हल्दी लगा रखे है वही कुछ लोग त्नात्रिक और पंडितो के चक्कर काट रहे और बदले ताबीज और मंत्रित वस्तु बेच रहे रहे है

कुछ देर पहले कुर्सेला में पुरानी बाजार में एक बेगुनाह को जो की कोलकत्ता का रहने वाला था उसे धर कर कूट दिया स्थानीय पुलिस की मदद से उसे अभी थाने में रखा गया है अन्धविश्वास इस कदर बढ़ गया कि अब आस पास में अंजान लोग चोटी कटवा नजर आने लगे बाद में पता चला कि सारी बातें कोरी अफवाह थी।

चोटी काटने की खबरें सबसे पहले राजस्थान से शुरू हुई। राजस्थान के दस गावों में अचानक अफवाह उड़ी की कोई रात में महिलाओं की चोटी काटकर ले जाता है। सबसे पहले राजस्थान की पुलिस ने इसे अफवाह बताया। वहां के अखबारों में इस अफवाह से सावधान रहने की खबरें छापी गई। लेकिन इसके बाद ये अफवाह आग की तरह हरियाणा में फैल गई। हरियाणा में पुलिस संभल पाती और लोगों को समझा पाती कि ये अफवाह उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक पहुंची।

हकीकत तो ये है कि जयपुर में एक महिला ने खुद ही अपनी चोटी काटी, सबूत के तौर पर चोटी काटते हुए उसका वीडियो भी मिल गया। लेकिन लोगों ने वीडियो पर नहीं महिला की मनगढ़ंत कहानी पर भरोसा करना शुरू कर दिया। दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक ही दिन में चोटी कटने की तीन घटनाएं सुनने को मिली। पहले महिलाओं ने कहा, तेज आवाज हुई और उनकी चोटी कट गई। इसके बाद एक कहानी सुनाई गई। ये कहानी इस तरह थी ।

“रात को बिल्ली ने काटी चोटी
कोई औरत आई और बाल काटे
बाबा दिखा और कट गए बाल
बाल कटने के पीछे कोई आत्मा
बिजली दिखी और बाल कट गए
नींद आई तो चोटी कट गई
बंदर दिखा कट गई चोटी
अदृश्य शक्ति काट रही बाल”

दरअसल चोटीकटवा और चोटीचोर जैसे शब्द अब मीडिया में घूमने लगे हैं। टीवी चैनल से सोसल मीडिया तक में इन शब्दों को खूब उछाला जा रहा है। लेकिन हकीकत ये है कि चोटीकटवा अभी तक नहीं मिला है ना कभी मिलेगा।

By न्यूज़ डेस्क

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