कोईभी व्यक्ति जन्म से महान नही कर्म से महान होता है : डॉ विद्यार्थी


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#पुष्पराज कुमार @ नारायणपुर# प्रखंडके सन साइन पब्लिक स्कूल के प्रांगण शिव प्राण मैटी मिशन ऑफ इंडिया के द्वारा संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की 126वी जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीपप्रज्वलित कर व तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य ललन कुमार ने किया।


मौके पर मिशन सचिव डॉ सुभाष कुमार विद्यार्थी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से महान नही होता है बल्कि कर्म से महान होता है। इस बात को नीच जाति में जन्म लिए बाबा साहेब अम्बेदकर ने अपने श्रेष्ठ कर्म से भारतीय संविधान को निर्माण कर सिद्ध कर दिखाया। इनका जन्म आज ही के दिन सन 1891 ईस्वी को मध्य प्रदेश के इंदौर के महू छावनी में हुआ था। इनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता भीमाबाई था। अपने माता-पिता की चौदहवीं संतान के रूप में जन्में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जन्मजात प्रतिभा संपन्न थे। भीमराव अंबेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था जिसे लोग अछूत और बेहद निचला वर्ग मानते थे। बचपन में भीमराव अंबेडकर के परिवार के साथ सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव किया जाता था। भीमराव अंबेडकर के बचपन का नाम रामजी सकपाल था। अंबेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्य करते थे और उनके पिता ब्रिटिश भारतीय सेना की मऊ छावनी में सेवारत थे। भीमराव के पिता हमेशा ही अपने बच्चों की शिक्षा पर जोर देते थे। सन 1894 में भीमराव अंबेडकर जी के पिता सेवानिवृत्त हो गए और इसके दो साल बाद अंबेडकर की मां की मृत्यु हो गई। बच्चों की देखभाल उनकी चाची ने कठिन परिस्थितियों में रहते हुये की। रामजी सकपाल के केवल तीन बेटे, बलराम, आनंदराव और भीमराव और दो बेटियाँ मंजुला और तुलासा ही इन कठिन हालातों मे जीवित बच पाए। अपने भाइयों और बहनों मे केवल अंबेडकर ही स्कूल की परीक्षा में सफल हुए और इसके बाद बड़े स्कूल में जाने में सफल हुये। अपने एक देशस्त ब्राह्मण शिक्षक महादेव अंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे के कहने पर अंबेडकर ने अपने नाम से सकपाल हटाकर अंबेडकर जोड़ लिया जो उनके गांव के नाम अंबावडे पर आधारित था।
मौके पर अवकाश प्राप्त शिक्षक राजेन्द्र कुमार मंडल ने कहा कि सैकड़ो वर्ष की गुलामी से भारत की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक स्थिति चरमरा गई थी। आजादी के बाद देश की सर्वागीण विकास एवं अपने खोये हुए अतीत को फिर से प्राप्त कर वैभवशाली राष्ट्र निर्माण हेतु एक सशक्त संविधान की आवश्यकता थी। जिसकी पूर्ति दो वर्ष ग्यारह महीने अठारह दिन के अथक प्रयास से डॉ भीमराव अंबेडकर ने की। डॉ भीमराव अंबेडकर बचपन से ही प्रतिभावान थे। होरहर विरवान के हो चिकने पात के कहावत को चरितार्थ करते हुए इन्होंने भारत ही नही पूरे विश्व को एक नई रोशनी दी।
मौके पर अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने कहा कि न्याय के साथ विकास हो ऐसी व्यवस्था संविधान के माध्यम से बाबा साहेब डॉ आंबेडकर ने दी। समानता लाने के लिए इन्होंने भारतीय संविधान में बहुत सारी धाराएं को लिखा।
मौके पर विद्यालय के निदेशक मनोज कुमार यादव ने छात्रों से भारतीय संविधान अनुपालन करने एवं इसकी रक्षा करने के लिए कहा ताकि भ्रष्टाचार मुक्त भारत का नवनिर्माण हो सके। इस अवसर पर सुरेंद्र झा, संजीव कुमार, दीपक प्रेमशंकर, मधुर मिलन नायक, अमरनाथ मिश्र, प्रेमशंकर भगत सहित सैकड़ो छात्र छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कुंदन कुमार ने किया।

By न्यूज़ डेस्क

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