चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ बगावती तेवर अपनाने वाले कलकत्ता हाई कोर्ट के जज जस्टिस कर्णन पर बड़ी कार्रवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कर्णन को अदालत, न्यायिक प्रक्रिया और पूरी न्याय व्यवस्था की अवमानना का दोषी मानते हुए छह महीने की सजा सुनाई है। जस्टिस कर्णन भारतीय जुडिशल सिस्टम के इतिहास में पहले ऐसे जज होंगे, जिन्हें पद पर रहने के दौरान जेल भेजे जाने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि आदेश का तुरंत पालन हो। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के बयानों को मीडिया में प्रकाशित किए जाने पर भी रोक लगा दी है।


इससे पहले, जस्टिस सी एस कर्णन ने सोमवार को भारत के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के 7 अन्य जजों को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। उन्होंने शीर्ष अदालत के 7 जजों की बेंच के सदस्यों के नाम लिए, जिनमें चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष और जस्टिस कुरियन जोसफ हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच ने जस्टिस कर्णन के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना कार्यवाही शुरू की थी और उनके न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज पर रोक लगा दी थी
क्या है पूरा मामला
जस्टिस कर्णन ने 20 पद पर काबिज जजों और सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इस संबंध में उन्होंने एक एक शिकायत भी की थी। अब उन्होंने CBI को इस शिकायत की जांच करने का आदेश दिया है। जस्टिस कर्णन ने CBI को निर्देश देते हुए इस जांच की रिपोर्ट संसद को सौंपने के लिए कहा है। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए CJI ने इसे अदालत की अमनानना बताया था। इसके बाद 7 जजों की एक खंडपीठ का गठन किया गया, जिसने जस्टिस कर्णन के खिलाफ कोर्ट के आदेश की अवमानना से जुड़ी कार्रवाई शुरू की।
अपने खिलाफ शुरू हुई अदालती कार्रवाई का सामना करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दो बार जस्टिस कर्णन को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन कर्णन इस आदेश को अनसुना करते हुए कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। फिर सुप्रीम कोर्ट ने 10 मार्च को उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वॉरंट जारी किया। कोर्ट ने उन्हें 31 मार्च से पहले अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। कर्णन कोर्ट तो आए, लेकिन उनके बगावती तेवर जारी रहे। इसके बाद, चीफ जस्टिस जे एस खेहर के नेतृत्व में सात जजों वाली बेंच ने सुझाव दिया कि अगर कर्णन अगर मानते हैं कि वह जवाब देने के लिए ‘मानसिक तौर पर चुस्त-दुरस्त नहीं हैं’ तो वह मेडिकल रिकॉर्ड पेश कर सकते हैं। हालांकि, कर्णन ने मेडिकल जांच कराने से भी इनकार कर दिया। मेडिकल जांच करने वाली टीम को उन्होंने वापस लौटा दिया।

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By न्यूज़ डेस्क

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