कोरचक्का में गांव के किशोर व उम्र के लड़कों को युवाओं ने ही पिछले वर्ष से गणेश चतुर्दशी पर प्रतिमा स्थापित कर तीन दिवसीय पूजनोत्सव करने का निर्णय लिया था. पिछले वर्ष यह आयोजन पूरी तरह से सफल रहा था. पिछले वर्ष की सफलता से प्रेरित होकर युवकों ने इस बार भी बढ़ चढ़कर पूजनोत्सव मनाने का निर्णय लिया था. 2 दिनों तक रात में भजन संध्या का आयोजन भी स्थानीय गायकों द्वारा किया गया था. विगत वर्षों में नवगछिया में कई जगहों पर गणेश चतुर्दशी पर भगवान सिद्धिविनायक की प्रतिमा स्थापित कर दो दिवसीय या तीन दिवसीय पूजा अर्चना करने का चलन शुरु हुआ है. परंपरागत तौर पर देखा जाए तो अमूमन नवगछिया में गणेश चतुर्दशी पर गणेश पूजन की परंपरा विगत सालों में नहीं के बराबर थी. यहां पर गणेश चतुर्दशी को चौथ चंदा के रूप में मनाया जाता है. लोग चंद्रदेव को अर्घ्यदान करते हैं और इसी के साथ यह पर्व समाप्त हो जाता है.
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यही कारण है कि गणेश चतुर्दशी पर ना कोई प्रशासनिक तैयारी की जाती है और ना ही पुलिस के स्तर से किसी प्रकार की चौकसी बरती जाती है. इस बार नवगछिया में करीब 25 नए जगहों पर भगवान सिद्धिविनायक की प्रतिमा स्थापित कर दो दिवसीय या तीन दिवसीय पूजनोत्सव शुरू किया गया है. गणेश चतुर्दशी परंपरागत त्योहार में नहीं आने के कारण ही प्रशासनिक रूप से इसकी किसी प्रकार की तैयारी नहीं की गयी. दूसरी तरफ प्रशासनिक पदाधिकारियों का अस्पष्ट निर्देश है कि अगर किसी गांव में इस तरह के आयोजन हो तो उसकी सूचना प्रशासन को दी जाए और प्रशासन सुरक्षा व विधि व्यवस्था के दृष्टिकोण से सारे इंतजाम कर लेगा.

ग्रामीणों ने बताया कि गणेश पूजन का आयोजन किए जाने से पूरे गांव में उत्साह का माहौल था. शाम को करीब 4:00 बजे युवाओं और किशोरों में उत्साह के साथ भगवान सिद्धिविनायक की प्रतिमा को एक विसर्जन यात्रा का रूप देते हुए, गणपति बप्पा मोरिया के नारों के साथ गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मड़वा के कलबलिया धार की ओर निकले थे. खासकर बच्चे इतने उत्साहित थे कि वह रंग अबीर के साथ सराबोर हो गए थे और आतिशबाजी भी कर रहे.

गांव की महिलाओं और युवतियों ने कहा कि उन लोगों ने सड़क पर तब तक विसर्जन जुलूस देखा जब तक वे उन लोगों की आंखों से ओझल नहीं हो गए. कुछ देर बाद ही ग्रामीणों के मोबाइल पर फोन आने शुरू हो गए. बात सामने आई कि 10 बच्चे डूब कर मर गए हैं. इसके बाद गांव का हुजूम मरवा गांव स्थित सड़क किनारे के पोखर के पास छूट गया. देखते ही देखते बच्चों के सब एक के बाद एक निकलते चले गए. रुदन क्रंदन से वातावरण गमगीन हो गया था. प्रकृति के इस क्रूड मजाक पर हर कोई गमगीन था और हर किसी की आंखें नम थी.

विसर्जन के समय स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि घटना का कारण नारियल को लूटने के क्रम में घटी. कलश के साथ स्थापित किए गए नारियल को एक युवक ने पोखर के किनारे ही गणपति बप्पा मोरिया का नारा लगाते हुए फेंक दिया. इसके बाद कुछ युवाओं व किशोरों का हुजूम उस नारियल को लूटने के लिए टूट पड़ा. इसी क्रम में एक के बाद एक बच्चे असंतुलित होते गए और अथाह पानी में डूबते चले गए. जब तक मौके पर मौजूद लोग कुछ कर पाते तब तक बड़ी संख्या में बच्चे पानी में विलीन हो चुके थे.
एक दो बच्चों को सुरक्षित निकाला भी गया. ग्रामीणों का कहना था कि विसर्जन जुलूस में ज्यादातर किशोर वह उम्र के ही लड़के थे. कुछ युवा थे. अगर विसर्जन जुलूस में अभिभावक वह बुजुर्ग साथ आते तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था. विसर्जन जुलूस में शामिल कुछ युवकों ने बताया कि उन लोगों को अंदाजा नहीं था कि पोखर में अथाह पानी है. अगर उन लोगों को इस बात का जरा भी अंदाजा होता की पोखर में डूबने के लायक पानी है तो वह लोग सावधानी बरत लेते.
