डॉ. नीतेश यादव

साथियों आपके सुख-दुख, आशा,अभाव एवं किसी भी तरह के संघर्ष की वेदना से मैं ना तो अनिभिज्ञ हूं और ना ही इससे परे मैं अपने जीवन की कल्पना कर सकता हूं ।


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मैं अति धैर्य के साथ आपके जीवन से जुड़ी प्रत्येक समस्याओं का निरंतर अंकन करता रहता हूं और तब मैं स्वंय को बेहद मर्माहत पाता हूं कि आप लोकतांत्रिक देश के सुसम्मानित और गरिमामय पद पर आसीन होकर भी विगत 10,15, सालों से समान काम समान वेतन जैसे अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित किए जा रहे हैं ये घोर निंदनीय परिदृश्य है।

मैं चंद बातें आपकी ओर से अपने राज्य के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी एवं हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के समक्ष काफी विनम्रता के साथ रखना इसलिए रखना चाहता हूं कि दोनों जगहों पर एक ही पार्टी की सरकार है।

मान्यवर आप भी मानते हैं कि शिक्षक युगों-युगों से देश ,धर्म और समाज में इतनेअधिक पूजनीय और वंदनीय रहें हैं कि से इन्हे ब्रम्हा, विष्णु, महेश के समकक्ष दर्जा दिया गया और बिना किसी शिक्षक के आप सब भी इस मुकाम को हासिल नहीं किए होंगे।

फिर उसी गरिमामय शिक्षक और उसके सम्मान को अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति हेतु क्यों रौंदा जा रहा?

आपने जब जैसा शिक्षक नियोजन नियमावली निकाला लोग उसी नियमानुकूल इस पद पर कार्यरत हुए आज महंगाई सुरसा के समान मुंह फाड़े खड़ी है , विद्यालय का कार्य प्रणाली जटिलताओं से इतना भर गया है कि एक एक शिक्षक को चार-पांच लोगों का कार्य अकेले दिन रात सुख- चैन हराम करके करना पड़ता है उस पर से अल्प वेतन और चार पांच माह पर वेतन भुगतान पर।

मुख्यमंत्री जी और प्रधानमंत्री जी आप ही सोचे शिक्षक भी हाड़ मांस का जीता जागता एक इंसान हैं उसका भी परिवार है उसके बच्चे भी पढ़ते हैं उन्हें भी हर रोज भूख लगती है अल्प वेतन और असमय वेतन ने उनके जीवन को इतना करुण और दुखदाई बना दिया है कि वो मकान भाड़ा, बच्चों का स्कूल फीस और बनिए का उधार तक ससमय नहीं भर पा रहा है उन्हें हर जगह सूद भरना पड़ता है और अपमानित होकर जीवन यापन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है वो भी महज आपकी हठधर्मिता के कारण।

महोदय आखिर वो अपनी मौलिक अधिकार आपसे मांग रहे हैं जो संवैधानिकता के अन्तर्गत आती है वो किसी उच्च पदाधिकारियों के समान अपने वेतन संरचना की मांग नहीं कर रहा है आप कभी वेतनभोगी शिक्षकों के घरों में जाकर देखें वहां भी कई जगह नन्हा-मुन्ना बचपन किलकारियां लेता हुआ।

आपको सहज दृश्यमान होगा और वो बदनसीब माता-पिता भी वही आपको मिल जाएंगे जो आपकी नौकरी करके भी सही तरह से पेट भी नहीं भर पा रहा है तो अपने बच्चे को टॉफी और खिलौना कहा से देंगे?

आपकी राजनैतिक लाभ की अदम्य लालसा और जीद्द की चक्कियों में शिक्षकों का जीवन और उनके बच्चों का बचपन सब पीस गया है।

आप कभी अपनी अंतरात्मा में झांक कर देखें क्या इतनी अधिक महंगाई और इतना कठीन विद्यालई कार्य के बदले क्या शिक्षक इतने तुच्छ वेतन के हकदार हैं?

प्रधानमंत्री जी आप तो इंसाफ की प्रतिमूर्ति है बुद्धिमान और बेहद गरीब परिवार से भी आते हैं फिर तो ग़रीबी और आर्थिक मार क्या होती है ये आपसे बेहतर तरीके से कोई समझ नहीं सकता आप हमारे बिहार के नियोजित शिक्षकों के साथ न्याय करें इन्हें इनका संवैधानिक अधिकार देने की घोषणा कर के इनके जीवन के कष्टों को दूर करने की महत्ती कृपा करें ये मेरा आपसे करबद्ध प्रार्थना और निवेदन है।

मुझसे अपने शिक्षक साथियों का आर्थिक यातनाओं से युक्त जीवन अब सहन नहीं होता आप इन्हें इनका संवैधानिक अधिकार शीध्रातीशीध्र देने की असीम कृपा करें इसी आशा विश्वास के साथ एक निवेदन महोदय के सेवा में सादर समर्पित कर रहा हू।

By न्यूज़ डेस्क

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