नवगछिया : जाह्नवी चौक से एक एक किलोमीटर पूरब अड़सठ बहियार में जय गरूदेव संस्था के तत्वावधान में आयोजित गुरू शिष्य समागम और संतमत सतसंग का तीनदिवसीय आयोजन राजस्थान और पटना से आये संतों की विदाई के साथ ही सम्पन्न हो गया. इस अवसर पर आयोजक बबलू मंडल ने अड़सठ बहियार में जयगुरूदेव का आश्रम बनवाने की घोषणा किया. इस अवसर पर उन्होंने जमीन दान देने की भी घोषणा की. इस अवसर पर 280 लोगों ने समारोह में पहुंच कर नशा छोड़ने का संकल्प लिया और ताउम्र शुद्ध शाकाहारी जीवन व्यतीत करने का संकल्प लिया.
– अड़सठ बहियार में आयोजित गुरू शिष्य समागम सम्पन्न, बनेगा जयगुरूदेव संस्था का आश्रम
– नशा भारतीय संस्कृति के खिलाफ : प्रभु बाबा
– शुद्ध शाकाहारी ही जा सकता है परमात्मा के करीब : चौधरी चरण सिंह
इस अवसर पर पटना जयगुरूदेव आश्रम के प्रमुख प्रभु बाबा ने कहा कि नशा और मांसाहार भारतीय संस्कृति के विरुद्ध है. राजस्थान से आये चौधरी चरण सिंह ने कहा कि नशा पान और मांसाहार किसी भी मनुष्य को परमात्मा के पास पहुंचने से रोकता है. नशा करने वाला पाशविक व्यवहार का हो जाता है और उसका चित्त पूरी तरह से अस्थिर हो जाता है और वह व्यभिचार में फंस पर अपने जीवन को बर्बाद कर देता है.

राजस्थान से आये शिवधारी बाबा ने कहा कि शुद्ध सात्विक जीवन ईश्वर की ओर अग्रसर होता है और इसका मार्ग कल्याण के साथ जुड़ जाएगा. मौके पर आयोजक बबलू मंडल और गंगोत्री जागरण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन कुमार ने सभी संतों और विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर गुलशन कुमार ने कहा कि गंगा कछार में आध्यात्मिक आयोजन काफी मायने रखता है.
उन्होंने नाश और मांसाहार के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को बताया. इस अवसर पर गंगोत्री जागरण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुलशन कुमार, प्रवक्ता चंद्रकांत मंडल, शिक्षक दयानंद सरस्वती, अभिनेता अजेश साहू, जदयू महासचिव सच्चिदानंद दास, पूर्व प्रमुख गुलचरण मंडल, कवि श्रवण बिहारी, किसान प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष पारसनाथ साहू, प्रभात कुमार, सरपंच रमचंद्र, जमीनदाता बबलू उर्फ अविनाश आदि अन्य भी थे.
आज भी जिंदा है जय गुरुदेव यानी सुभाष चंद्र बोस
अड़सठ बहियार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. आयोजन स्थल पर नेता जी सुभाष चंद्र बोस की चर्चा गरम रही. जय गुरुदेव सम्प्रदाय के संतों का कहना था कि उनके संस्था के संस्थापक जय गुरूदेव ही नेता जी सुभाष चंद्र बोस ही थे. जयगुरूदेव संस्था का मानना है कि नेता जी की मौत हवाई हादसे में नहीं हुई थी. वे आजादी के बाद भी अलग अलग वेश में रहे. आज भी वे जीवित हैं.


