खरीक (भागलपुर)। वर्षों से गंगा के कटाव और विस्थापन की समस्या झेल रहे नवगछिया अनुमंडल के खरीक प्रखंड स्थित राघोपुर-शंकरपुर क्षेत्र के लिए बड़ी योजना सामने आई है। राज्य सरकार की ओर से गंगा तट के समानांतर करीब 180 किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट (मरीन ड्राइव) विकसित करने की योजना पर चर्चा चल रही है। प्रस्तावित परियोजना राघोपुर के ऐतिहासिक जाह्नवी धाम से बेगूसराय के सिमरिया घाट होते हुए वैशाली के विदुपुर तक जाएगी।
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जानकारी के अनुसार, इस मेगा परियोजना की अनुमानित लागत करीब 60 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। परियोजना को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित करने की योजना है। इसे अलग-अलग चरणों में पूरा किए जाने की संभावना है।
राघोपुर से सिमरिया तक 80 और सिमरिया से विदुपुर तक 100 किमी
प्रस्तावित रिवर फ्रंट के खाके के अनुसार, पहले चरण में राघोपुर स्थित जाह्नवी धाम से सिमरिया घाट तक करीब 80 किलोमीटर और सिमरिया घाट से वैशाली के विदुपुर तक करीब 100 किलोमीटर का नेटवर्क विकसित करने की योजना है।

विदुपुर में इस रिवर फ्रंट को पटना और आसपास के प्रमुख सिक्स-लेन सड़क नेटवर्क से जोड़ने की बात कही जा रही है। परियोजना के आकार लेने पर भागलपुर, अंग क्षेत्र और आसपास के इलाकों से पटना की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
डीपीआर के बाद साफ होगा वास्तविक स्वरूप
परियोजना के लिए अलाइनमेंट, फिजिबिलिटी स्टडी, डिजाइन, मिट्टी की स्थिति और एलिवेटेड स्ट्रक्चर समेत तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए तकनीकी एजेंसी के चयन के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराई जा सकती है।
बताया जा रहा है कि परियोजना को दो से चार चरणों में बांटकर विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अंतिम अलाइनमेंट, लागत, निर्माण अवधि और अन्य तकनीकी बिंदु डीपीआर तथा संबंधित सरकारी मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट होंगे।
जाह्नवी धाम में धार्मिक कॉरिडोर का भी प्रस्ताव
राघोपुर स्थित जाह्नवी धाम को भी इस योजना से जोड़ने की बात सामने आई है। स्थानीय विधायक सह पथ निर्माण विभाग के पूर्व मंत्री इं. शैलेंद्र के अनुसार, गंगा के उत्तरायण होने के कारण जाह्नवी धाम का धार्मिक महत्व विशेष है।
यहां हरिद्वार के हर की पौड़ी और सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम की तर्ज पर धार्मिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना बताई गई है। इसके तहत आधुनिक घाट, रिवर वॉक-वे, हरित क्षेत्र और प्रकाश व्यवस्था जैसी सुविधाएं विकसित किए जाने की परिकल्पना है।
कटाव प्रभावित क्षेत्र को मिल सकती है नई पहचान
राघोपुर-शंकरपुर समेत गंगा किनारे के इलाकों में लंबे समय से कटाव और विस्थापन बड़ी समस्या रही है। प्रस्तावित रिवर फ्रंट से यदि परियोजना धरातल पर उतरती है तो क्षेत्र में सड़क संपर्क, धार्मिक पर्यटन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।
इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर 5 सितंबर को राघोपुर पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्थानीय विधायक इं. शैलेंद्र के बीच चर्चा होने की बात कही गई है। अब परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, अलाइनमेंट और डीपीआर के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 180 किलोमीटर के इस प्रस्तावित रिवर फ्रंट का वास्तविक स्वरूप क्या होगा।
