नारायणपुर: पुष्पराज कुमार (संवाद सूत्र) : जिले के नारायणपुर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय मधुरापुर बालक में छात्र-छात्राओं के बीच एलईडी स्क्रीन के माध्यम से उत्साह भरने की कोशिश की गई। एलईडी में सत्याग्रह से कई जुड़े कहानी का वर्णन करते हुए दिखाई गई जिसमें बताया गया कि सत्याग्रह, उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका के भारतीयों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून भंग शुरु करने तक संसार नि:शस्त्र प्रतिकार अथवा निष्क्रिय प्रतिरोध की युद्धनीति से ही परिचित था।
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यदि प्रतिपक्षी की शक्ति हमसे अधिक है तो सशस्त्र विरोध का कोई अर्थ नहीं रह जाता। सबल प्रतिपक्षी से बचने के लिए नि:शस्त्र प्रतिकार की युद्धनीति का अवलंबन किया जाता था। इंग्लैंड में स्त्रियों ने मताधिकार प्राप्त करने के लिए इसी निष्क्रिय प्रतिरोध का मार्ग अपनाया था। इस प्रकार प्रतिकार में प्रतिपक्षी पर शस्त्र से आक्रमण करने की बात छोड़कर उसे दूसरे हर प्रकार से तंग करना, छल कपट से उसे हानि पहुँचाना अथवा उसके शत्रु से संधि करके उसे नीचा दिखाना आदि उचित समझा जाता था।


गांधी जी को इस प्रकार की दुर्नीति पसंद नहीं थी। दक्षिण अफ्रीका में उनके आंदोलन की कार्यपद्धति बिल्कुल भिन्न थी उनका सारा दर्शन ही भिन्न था अत: अपनी युद्धनीति के लिए उनको नए शब्द की आवश्यकता महसूस हुई। सही शब्द प्राप्त करने के लिए उन्होंने एक प्रतियोगिता की जिसमें स्वर्गीय मगनलाल गांधी ने एक शब्द सुझाया ‘सदाग्रह’ जिसमें थोड़ा परिवर्तन करके गांधी जी ने “सत्याग्रह” शब्द स्वीकार किया। अमरीका के दार्शनिक थोरो ने जिस सविनय अवज्ञा की टेकनिक का वर्णन किया है, “सत्याग्रह’ शब्द उस प्रक्रिया से मिलता जुलता था।
“सत्याग्रह” का मूल अर्थ है सत्य के प्रति आग्रह सत्य को पकड़े रहना। अन्याय का सर्वथा विरोध करते हुए अन्यायी के प्रति वैरभाव न रखना, सत्याग्रह का मूल लक्षण है। हमें सत्य का पालन करते हुए निर्भयतापूर्वक मृत्य का वरण करना चाहिए और मरते मरते भी जिसके विरुद्ध सत्याग्रह कर रहे हैं, उसके प्रति वैरभाव या क्रोध नहीं करना चाहिए।
अपने विरोधी के प्रति हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। धैर्य एवं सहानुभूति से विरोधी को उसकी गलती से मुक्त करना चाहिए, क्योंकि जो एक को सत्य प्रतीत होता है, वहीं दूसरे को गलत दिखाई दे सकता है। धैर्य का तात्पर्य कष्टसहन से है। इसलिए इस सिद्धांत का अर्थ हो गया, “विरोधी को कष्ट अथवा पीड़ा देकर नहीं, बल्कि स्वयं कष्ट उठाकर सत्य का रक्षण।
गांधी जी ने लार्ड इंटर के सामने सत्याग्रह की संक्षिप्त व्याख्या में कहा यह ऐसा आंदोलन है जो पूरी तरह सच्चाई पर कायम है और हिंसा के उपायों के एवज में चलाया जा रहा। सत्याग्रह में स्वयं कष्ट उठाने की बात है। सत्य का पालन करते हुए मृत्यु के वरण की बात है।
इस मौके पर विद्यालय के शिक्षक रविकान्त शास्त्री, सदय कुमार, बिनोद मंडल आदि कई शिक्षक मौजूद थे।
