नवगछिया: प्राथमिक विद्यालय नासि टोला मदरौनी प्रखंड रंगरा चौक जिला भागलपुर की शिक्षिका पुष्पांजली देवी का आज तड़के सुबह निधन हो गया पुष्पांजलि देवी पिछले 3 वर्षों से ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित चल रही थी
Total Downloads: 72

बार-बार सर में दर्द आता था आर्थिक विपन्नता के चलते समुचित इलाज के अभाव में मौत हो गई 2003 बैच की पुष्पांजलि देवी मृदुल स्वभाव प्रतिभाशाली शिक्षक होने के कारण प्रखंड एवं शिक्षक समाज के बीच लोकप्रिय थी अपने पीछे पति वीरेंद्र दास के अलावा एक पुत्र एक पुत्री को छोड़कर चली गई पढ़ने में काफी तेज पुष्पांजलि देवी झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा भी क्वालीफाई की थी मूल रूप से कहलगांव की रहने वाली जिनकी शादी मदरौनी निवासी वीरेंद्र दास के साथ हुई थी मौत की खबर सुनते ही शिक्षकों में शोक की लहर दौड़ गई सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित करने का सिलसिला जारी रहा है सैकड़ों शिक्षक उनके पार्थिव शरीर के दर्शन हेतु आवास पर पहुंचे गजेंद्र यादव जिला अध्यक्ष अशोक यादव प्रखंड अध्यक्ष धर्मवीर दास प्रभात कुमार प्रियदर्शी बलराम कुमार पार्वती कुमारी सुनीता कुमारी संगीता कुमारी राज बंधु यादव सोनू कुमार ममता कुमारी करण कुमार सिंह प्रदेश अध्यक्ष पूरण कुमार के प्रतिनिधि स्वरूप जगदीशपुर प्रखंड सचिव रामचंद्र साह पंकज कुमार उनके विद्यालय के प्रधानाचार्य केशव कुमार सिंह सहयोगी शिक्षिका गुड़िया कुमारी मुकेश कुमार सिंह काफी गमगीन दिखे सभी शिक्षकों की आंखों में आंसू छलक पड़े मौके पर उपस्थित वरीय प्रखंड साधनसेवी रंगरा चौक मुकेश मंडल ने कहा ना जाने किन की नजर शिक्षक समाज को लग गई है पिछले एक माह में नवगछिया अनुमंडल में पुष्पांजलि देवी सहित 4 शिक्षकों का निधन हो गया अजय मंडल मुरली रंगरा चौक सुमन कुमार रोशन सिमरिया रंगरा चौक सुनील कुमार झा नारायणपुर शंभू कुमार मंडल गोपालपुर सरकारी लाभ के तौर पर नियोजित शिक्षकों को अनुग्रह राशि के रूप में मात्र 400000 रुपय देने का फिलहाल प्रावधान है इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपया करने की आवश्यकता है अनुकंपा पर नियोजन हेतु आश्रितों को प्रशिक्षित होने के बाध्यता समाप्त करना अत्यंत आवश्यक है अन्यथा अनुकंपा देने का कोई औचित्य ही नहीं है क्योंकि बिहार में प्रशिक्षण संस्थानों का घोर अभाव है ऐसे में मृतक आश्रित प्रशिक्षण प्राप्त किए हुए नहीं रहते हैं और उन्हें अनुकंपा का लाभ नहीं मिल पाता है हम सरकार से मांग करते हैं मृतक आश्रित को नियोजित करते हुए 5 साल का समय दिया जाए प्रशिक्षित होने का और उन्हें विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में प्राथमिकता के तौर पर नामांकन दिलाया जाए

