ऋषव मिश्रा कृष्णा, नवगछिया : सीतारामशरणजी महाराज का यह भजन मंगलवार की शाम सैकड़ों परिवारों के जेहन में विचरण करता रहा. अब श्रद्धालुओं की अंतर्आत्मा भी महंथजी के दर्शन के लिए तरसा करेंगी. बुधवार से ठाकुरबाड़ी में उनकी कुर्सी खाली मिलेगी. शिवालय के पास स्थित उनकी कुर्सी के सामने सिर झुकाकर सजदा तो होगा, उनके टेबुल पर पुष्प अर्पण भी होगा, लेकिन आशीर्वाद लेने के लिए महात्मा जी के पांव नहीं दिखेंगे, शिष्यों के सिर पर उनका आशीर्वाद भरा हाथ नहीं होगा. बड़ी घाट ठाकुरबाड़ी के महंथ सीताराम शरणजी महाराज का जाना नवगछियावासियों पर दु:ख के पहाड़ टूटने से कम नहीं है.
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नवगछिया बाजार के कई परिवार बाबा के देहावसान के बाद खुद को अनाथ समझने लगे हैं. मन में आध्यात्मिक प्रश्नों का उठना हो, किसी तरह का भटकाव हो, घर-परिवार में कहासुनी हो, पड़ोसी से विवाद हो, व्यापार में असफलता हो या फिर अन्य किसी तरह की समस्या, लोग समाधान की तलाश में सीताराम शरणजी महाराज के पास पहुंचते थे. जिस तरह बच्चों को समस्या होने पर माता-पिता के पास पहुंचते हैं, उसी प्रकार खासकर बाजार के सैकड़ों परिवारों के लिए बाबा ही अभिभावक थे. त्वरित समाधान होने में भले कुछ समय लगे, लेकिन उनका दर्शन करने और उनके समझाने भर से लोगों के मन की अशांति तत्काल दूर हो जाती थी. कोलाहल भरे आध्यात्मिक कार्यक्रमों से इतर उनका प्रवचन हमेशा से शांतिपूर्ण रहा.

महात्मा रचित पुस्तकों में जीवन का सार
कई पुस्तकों की रचना कर चुके बाबा सीताराम शरणजी महाराज की पुस्तक-मानें करे तो, में जीवन का सार छिपा हुआ था. उनके इस पुस्तक में दर्ज एक-एक सीख मानवता, प्रगतिशीलता और सफलता का गूढ़ रहस्य समझा जाती है. महात्मा की बातें घर-परिवार के झंझट, वैमनस्य, असफलता, अशिक्षा जैसी समस्याओं से समाधान सिखा जाती हैं. बाद में आगमानंदजी महाराज ने इस पुस्तक का पुनप्र्रकाशन कराया. साथ ही अपने संपादन में निकाली जा रही पत्रिका आध्यात्मिक ज्योति में भी क्रमश: प्रकाशित किया. महात्मा जी के कई पुस्तक व आलेखों से लोग जीवन में प्रेरणा ग्रहण करते रहे हैं.

