भागलपुर के नाथनगर नरगाह स्थित महाशय ड्योढ़ी और सुजापुर दुर्गा स्थान के प्रांगण में 400 साल से चली आ रही कौड़ी लुटाने की पंरपरा एक बार फिर निभाई गई।
इससे पहले बुधवार को सुबह 7:15 बजे मां देवी दुर्गा के आह्वाहन को लेकर बोधन घट यात्रा निकाली गई। इस दौरान श्रद्धालु बंगाली टोला परिसर होते हुए बंगाली टोला घाट गए जहां कलश में गंगा जल मंत्रोच्चारण के साथ भरा गया। इसके बाद वापस दुर्गा मंदिर लाकर पूजा अर्चना और आरती के बाद 201 कौड़ी लूटाने का कार्यक्रम शुरू किया गया।
मंदिर के सेवायत पलटन घोष ने बताया कि कौड़ी लुटाने की परंपरा काफी पुरानी है। कौड़ी का महत्व सीधे कुबेर धन की प्राप्ति से है। जिसे कौड़ी मिल गयी मानो उसे धन धान्य व वैभव की प्राप्ति हो गयी।

उन्होंने बताया कि इस कौड़ी को खासकर महिलाएं अपनी सिंदूर के किये में या पूजन स्थल पर श्रद्धापूर्वक रखती हैं। ऐसा मानना है कि पूजा स्थल और सिंदूर के किये में कौड़ी रखने से घर की सारी आर्थिक समस्या समाप्त हो जाती है। इसके अलावा चतुर्थी और सप्तमी पूजा के दिन भी दोनों मंदिरों से बोधन घट निकाला जाएगा उसदिन भी हजारों श्रद्धालुओं के बीच कौड़ी लुटाई जाएगी। काकुली बनर्जी ने बताया कि सुहागन इस कौड़ी को अपने सिंदूर के किये में संभाल कर रखती हैं और पति की लंबी उम्र की मां भगवती से कामना करती हैं।
बंगाली परंपरा के अनुसार कौड़ी को कुबेर धन प्राप्ति का द्योतक माना गया है। अत: इस 400 साल से भी अधिक पुरानी परंपरा को आज भी कायम रखा गया है।


